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मेट्रो का मूल्यांकन

दिल्ली में बारिश भले न हो रही हो पर दक्षिण दिल्ली में मेट्रो रेल का निर्माणाधीन खंभा टूट कर गिरने के बाद उस पर बरसने वालों की बाढ़ आ गई है। शुक्रवार को लोकसभा में नियंत्रक और लेखा महापरीक्षक (सीएजी) की जो रपट पेश की गई, उसमें दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन (डीएमआरसी) को कटघरे में खड़ा करते हुए साफ आरोप लगाया गया है कि उसने समय से पहले काम पूरा करने का तमगा लेने के लिए कई जरूरी परीक्षण नहीं किए। रपट यह भी कहती है कि मेट्रो के डिब्बों की फर्श में दरारें मिलीं और पहियों में जंग लगा हुआ था। इस रपट को लेकर डीएमआरसी के आलोचकों ने बिना यह सोचे तलवारें भांजना शुरू कर दिया कि यह मूल्यांकन तो मेट्रो के पहले चरण के बारे में है जो पूरा हो चुका है और पूरी रफ्तार से दौड़ रहा है। और जिस हिस्से में हादसा हुआ है, उसका इस रपट से कोई लेना-देना नहीं है। आखिर क्या वजह है कि दिल्ली की जिस मेट्रो रेल की तारीफ करते हुए मीडिया नहीं अघाता था, वही आज उसे निशाने पर रखे हुए है। गनीमत मानिए कि अभी भी उसे श्रीधरन जैसी विश्वसनीयता वाले इंजीनियर का नेतृत्व मिला हुआ है, वरना उसकी प्रतिष्ठा को धूलधूसरित कर दिया गया होता। यह सही है कि मेट्रो रेल जैसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को दोष रहित होना चाहिए और इसके लिए उसकी पूरी निगरानी की जानी चाहिए। पर निगरानी की इस शर्त को लालफीते में इतना नहीं लपेट देना चाहिए कि उसका चक्का ही जाम हो जाए।

डीएमआरसी अगर समय से पहले अपनी परियोजनाएं पूरी कर पा रहा है तो इसीलिए क्योंकि उसे लगभग एक विशेष स्वायत्त संगठन के रूप में काम करने दिया गया है। हालांकि सीएजी को इसी बात का रश्क रहा है कि शहरी विकास मंत्रालय यह समझ ही नहीं पा रहा था कि यह उसके मातहत है। हाकिम और मातहत की इसी संस्कृति के चलते यहां आजादी के चार दशक बाद तक धीरे-धीरे चलने और धीरे-धीरे प्यार करने की सीख दी जती रही है। स्वराज पाल के शब्दों में यहां पूंजीवाद धीरे-धीरे आया तो गोरख पांडे ने भी समाजवाद को धीरे-धीरे आते देखा था। मेट्रो ने संकरी सड़कों के जाम में लड़ते-झगड़ते शहर को रफ्तार ही नहीं, नई संस्कृति दी है। यह संस्कृति पूर्ण नहीं है, न ही इसे बनाने वाले कोई देवता हैं पर हमें उनका दानवीकरण नहीं करना चाहिए। इसलिए मेट्रो का मूल्यांकन ऐसी वज्ञानिक नजर से होना चाहिए, जो हमें पीछे ढकेलने के बजाय आगे ले जाए।

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  • Web Title:मेट्रो का मूल्यांकन