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गोलकीपर बलजीत का करियर खतरे में

गोलकीपर बलजीत का करियर खतरे में

हॉकी में गोल्फ की गेंद से प्रैक्टिस। गोलकीपिंग कोच रोमियो जेम्स का यह स्टाइल है। चंडीगढ़ में पंजाब गोल्ड कप हॉकी के दौरान भी हमने ऐसा ही कुछ नजरा देखा था। रोमियो का यह अंदाज भारत के स्टार गोलकीपर बलजीत सिंह के लिए मुसीबत बन गया। 28 साल के बलजीत भविष्य में हॉकी खेल भी पाएंगे या नहीं यह भी कहना अभी मुश्किल है। कल शाम पुणे में उन्हें गोल्फ की गेंद से प्रैक्टिस के दौरान आंख में चोट लगी और तुरत-फुरत उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया।

पुणे से उन्हें तुरंत ही दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान रेफर कर दिया गया। सुबह कोच हरेन्द्र, मैनेजर जगबीर और फिजियो श्रीकांत बलजीत को पहली फ्लाइट से दिल्ली लेकर आए। एम्स में लगभग तीन घंटे तक ऑपरेशन चला। ऑपरेशन तो सफल हो गया लेकिन डॉक्टरों को अभी भी उनकी आंख की रोशनी बचने के 50-50 प्रतिशत ही संभावना नजर आ रही है।
हॉकी इंडिया के सचिव असलम खान ने इस बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा, ‘मुझे शुक्रवार देर रात फोन आया था। इसके तुरंत बाद मैंने एम्स में सारा इंतजम करवा दिया। रेटिना स्पेशलिस्ट डॉक्टर सुदर्शन खोकर ने उनका ऑपरेशन किया। हां, उन्होंने यह भी बताया कि उनकी आंखों की रोशनी आने की संभावना 50-50 प्रतिशत है।’

लाखों-करोड़ों में एकाध बार ऐसा होता है। आज से नहीं सालों से इस तरह की प्रैक्टिस चल रही है। हेल्मेट और वाइजर सबकुछ लगा कर प्रैक्टिस कर रहे थे बलजीत। फिर भी गेंद सीधी जकर उनकी आंख में भी लगी। पंजाब गोल्ड कप के दौरान हमारी बलजीत से बात हुई थी। उस समय उन्होंने कहा था, मैं कभी हार नहीं मानता और मेरी सफलता का यही कारण है। लेकिन आज बलजीत हार गए। हॉकी से हार गए। दुआ करें कि वे फिट हो जएं और फिर से हॉकी के टर्फ पर नजर आएं। उनके स्थान पर अब यूरोप टूर के दौरान अंडर-22 के गोलकीपर पी.आर. श्रीजेश यह जिम्मेदारी निभाएंगे।

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