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जब अच्छी लड़की मिलेगी तब शादी करूंगा

जब अच्छी लड़की मिलेगी तब शादी करूंगा

नौ महीने बाद मुंबई आकर कैसा लग रहा है?
बहुत अच्छा लग रहा है, पर न्यूयॉर्क की याद आ रही है। कुछ मामलों में मुंबई और मैनहट्टन में बहुत समानता है। दोनों स्थानों पर कई समुदाय के लोग रहते हैं। माहौल गरम और ऊर्जा युक्त रहता है, लेकिन वहां सीवर की व्यवस्था अच्छी है। बहुत से पार्क और सड़कें हैं। मुझे कार ड्राइव करना बहुत अच्छा लगता है, पर वहां तीन महीनों तक मेरे पास कार नहीं थी। या तो मैं कैब में चलता था, या ट्रेन से या फिर पैदल।

क्या आप स्टार होने की खुशी मिस करते हैं?
नहीं। मुझे ऐसा लगता था, जैसे मैं फिर से 21 साल का हो गया हूं और मुझे वहां कोई नहीं जानता, पर वहां प्रशंसकों ने मुझे पहचान लिया था। मुझे कैब के लिए लगभग पेमेंट नहीं करना पड़ा। यदि मैं पेमेंट करता तो भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के कैब्स वालों का अपमान होता। वहां भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के लोगों में फर्क नहीं महसूस होता। सभी दोस्त हैं।

कान महोत्सव में आपकी रोड मूवी की काफी चर्चा रही?
उसका वितरण फोर्टलियो फिल्म्स करेगी। बहुत दिलचस्प फिल्म है। उसमें मेरी भूमिका एक ट्रक ड्राइवर की है। ट्रक में मूविंग सिनेमा दिखाने की व्यवस्था है। मैं ट्रक लेकर शहर-शहर घूमता हूं। ट्रक 1943 के समय का था, जिसे चलाने में काफी परेशानी हुई। जब मैं ट्रक चलाने का आदी हो गया, तब सिनेमैटोग्राफर माइकल ने मुझ से कहा कि मैं स्टंट दृश्यों के लिए भी इसे ड्राइव करूं, क्योंकि मैं अकेला व्यक्ति था, जो इसे ठीक से चला सकता था।

आपके बैनर का नाम ‘फॉरबिडन फिल्म्स’ है। ऐसा क्यों?
जब मैं धीरे-धीरे बड़ा हो रहा था, तब मुझे बहुत से लोग सुझाव दे रहे थे कि मुङो क्या नहीं करना चाहिए। मैं जो करना चाहता था, वह मुझे मना कर दिया जाता था। करियर की शुरुआत में मुझसे बार-बार कहा जाता था कि मैं संघर्ष नहीं कर सकता। तब मैंने कम बजट की बिना फॉर्मूला वाली, अच्छे विषय वाली फिल्मों पर ध्यान देना शुरू किया, क्योंकि इसमें रिस्क कम था। मेरे लिए रचनात्मक संतुष्टि और विश्वसनीयता ज्यादा महत्त्वपूर्ण है। मुझे मालूम था कि सफल होने पर पैसा और प्रसिद्धि तो मिलेगी ही।  इस बिजनेस में आपको दोस्तों की जरूरत नहीं है और आपको किसी का एहसानमंद होने की भी जरूरत नहीं। क्योंकि यहां कोई किसी के लिए कुछ नहीं करता। आज जब मैं अपनी फिल्में बनाने के लिए तैयार हूं, तब मैं वही करना चाहता हूं, जो मेरे लिए मना था।

आपने एक लंबा रास्ता तय किया है। पर कुछ लोग तो ‘देव डी’ को अश्लील फिल्म मानते हैं?
एक तरह से तो इसमें थोड़ी बहुत ऐसी बाते थीं भीं। पर ऐसा कुछ अधिक नहीं था, जिससे आप परेशानी महसूस करें।  बॉलीवुड की आम फिल्मों में एक्ट्रेस कम कपड़े पहनती हैं। मैंने देखा है कि ‘यू’ सर्टिफिकेट की फिल्में ज्यादा अश्लील होती हैं।

दिलीप कुमार और शाहरुख खान ‘देवदास’ में काम करते समय तनाव महसूस कर रहे थे। और आप?
हां, थोड़ा बहुत मुझे भी ऐसा लग रहा था। पता नहीं इस तरह का एहसास रोल की वजह से था याजिंदगी में मेरा जो दौर था, उसकी वजह से।

आप 33 वर्ष के हो चुके हैं। शादी के लिए जोर तो पड़ता ही होगा?
(हंसते हुए) पहले मेरे माता-पिता शादी की ओर इशारा करते थे, पर दो-तीन वर्षो से कोई कुछ नहीं कहता। उन्हें अहसास हो चुका है कि जब मैं चाहूंगा, तभी शादी करूंगा। जब मुझे अच्छी लड़की मिलेगी, शादी कर लूंगा।

आपके चचेरे भाई सनी और बॉबी नहीं चाहते कि उनके होम प्रोडक्शन में आप साथ हों?
वे हमेशा चाहते हैं कि मैं वही करूं, जो करने की मेरी इच्छा है। चाहे मैं एक्टिंग करूं, पेंटिंग करूं, मूíतकला का काम करूं, जो मन में आए करूं। भैया (सनी) ने मुझ पर जोर दिया था कि मैं विदेश में पढ़ाई करूं। जब मैं पढ कर लौटा और मैंने कहा कि मैं फिल्मों में काम करना चाहता हूं तो उन्होंने मेरे लिए ‘सोचा न था’ बनाई।

सुना है कि आप न्यूयॉर्क में अपार्टमेंट खरीदेंगे?
हो सकता है। वहां मेरे दोस्त हैं। मेरी बहन हैं। जब इच्छा हो होकर आ सकते हैं।
इस साल अभय देओल को दो फिल्में आयीं और दोनों फिल्मों ‘ओय लक्की लक्की ओये’ और ‘देव डी.’ में लोगों ने उन्हें पसंद किया। दोनों ही फिल्में औसत से ज्यादा बिजनेस कर बॉक्स ऑफिस पर सफल भी रहीं, पर अभय पिछले काफी समय से इंडस्ट्री से गायब हैं। वह न तो फिल्मों की शूटिंग कर रहे हैं और न ही सोशल सर्किट में दिखाई दे रहे हैं। अब खबर है कि वह वापस मुंबई आ गये हैं। पेश है उनसे हुई मुलाकात के कुछ अंश।

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