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बिन ब्याही मां, बच्ची को दूध नहीं पिलानी चाहती

पश्चिम बंगाल निवासी एक 21 वर्षीय युवती ने उल्लावास की पहाड़ियों के पास एक बच्ची को जन्म दिया। इसे जन्म देने के बाद अचानक बेहोश होने पर ग्रामीणों ने इस मामले की पुलिस में शिकायत की। पुलिस ने तुरंत बादशाहपुर स्थित सोना देवी मेमोरियल अस्पताल में उसे भर्ती कराया, जहां वह उपचाराधीन है। लेकिन, विडंबना यह है कि सब कुछ ठीक ठाक होने के बावजूद मां, अपने बच्चे को दूध तक पिलाने को राजी नहीं है। नतीजतन, बच्चे को दूसरे निजी अस्पताल में भेजना पड़ा। अस्पताल प्रबंधन इस बात को लेकर चिंतित है कि मानवता के नाते जच्चा बच्ची को सुरक्षित बचाने का खामियाजा उन्हें कुछ इस तरह भुगतना पड़ेगा।

बच्चे के जन्म होने के सात दिन बाद, ना तो सरकारी तंत्रों को इसकी परवाह है और ना ही बच्चे की मां इस बात को लेकर थोड़ी भी चिंतित है। अस्पताल के डा. नरेन्द्र शर्मा के मुताबिक बच्ची की मां ना तो पिता के बारे में कुछ बता रही है और बांग्ला भाषी होने के कारण, उसकी बातें समझने के लिए एक व्यक्ति को अलग से बुलाया गया है। अब समस्या यह है कि आखिरकार, बच्ची और उसकी मां को कहां भेजा जाए, उनकी परवरिश कौन करेगा? स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक ऐसे बच्चों के लिए अनाथालय में ही जगह है। लेकिन, समाज में लड़कियों की कम होती संख्या और भ्रूण हत्या पर लगातार शिकंजा कसने की कवायदे कमजोर नजर आने लगी हैं।

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