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31 जुलाई है टैक्स रिटर्न की आखिरी तारीख

आंकड़ें सही होने चाहिए

टैक्स रिटर्न भरना एक महत्वपूर्ण काम है। इसे कायदे से, सूझबूझ और सावधानी के साथ भरा जाना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि आप अपने सभी आय स्रेतों की पहचान करें, सभी कागजात एकत्र करें, अपनी सकल आय, सेक्शन 80 की डिडक्शन और कुल टैक्सयोग्य आय का हिसाब लगाएं। इस सारी कार्यवाही को आसान बनाने के लिए अपनी आय तथा खर्चों को एक पर्चे पर लिख कर रखें। बता रहे हैं सुनील धवन और स्वामी सरन शर्मा

अब तक आप अपने कागजातों को करीने से देखकर हिसाब-किताब जोड़ चुके होंगे कि आपकी कितनी टैक्स देनदारी बनती है और आप यह भी देख चुके होंगे कि आपको टैक्स देना है या फिर आपका मामला टैक्स रिफंड का है? आप कैसे जानेंगे कि आपका निष्कर्ष सही है? यह करने के लिए आपको सभी स्रोतों से होने वाली आय को जोड़ना होगा। इससे आपको अपनी सकल आय का पता लग सकेगा। अपनी कुल टैक्सयोग्य आय का पता लगाने के लिए आपको सकल आय में से मानक टैक्स कटौतियों (सेक्शन 80) को निकालना होगा। यहां पेश है आय के पांच शीर्षक और जानिए इनमें क्या है छिपा।

वेतन से आय

सकल वेतन में शामिल होती है बेसिक सेलरी, कमीशन, भत्ते और अन्य अनुलाभ। इसमें से कई कटौतियों को निकाला जा सकता है। शेष को वेतन आय के शीर्षक के अधीन रखा जाता है। आपका बेसिक वेतन, भत्ते, कमीशन और बोनस पूरी तरह से टैक्सयोग्य हैं।
मकान किराया भत्ता (एचआरए) : यदि आप वास्तविक रूप से किराये का भुगतान कर रहे हैं तो इसमें एक सीमा तक छूट मिलती है। इन तीन राशियों में से न्यूनतम-मिलने वाला वास्तविक एचआरए, बेसिक वेतन के 10 प्रतिशत तक दिया गया किराया तथा आपके बेसिक वेतन का 40 फीसदी (मुंबई, कोलकाता, दिल्ली और चेन्नई के लिए 50 प्रतिशत)- छूट योग्य होगा। हर महीने 800 रुपये तक कन्वेयेंस एलाउंस भी टैक्स से मुक्त होगा।
अवकाश यात्रा भत्ता (एलटीए) : यह आपके अवकाश पर रहते हुए भारत के अंदर स्वयं और अपने परिवार पर होने वाले यात्रा व्यय का रिइम्बर्समेंट होता है। वैसे तो आपको हर वर्ष एलटीए मिल सकता है लेकिन चार साल के दौरान सिर्फ दो बार ही यह टैक्स में छूट का हकदार होता है। यह दोनों यात्राएं इन चार वर्षो में कभी भी की गई हों या इस अवधि को दौरान हों।
मेडिकल एलाउंस: स्वयं और आपके परिवार द्वारा चिकित्सा मद में किए गए खर्च का रिइम्बर्समेंट एक वर्ष में 15,000 रुपये तक टैक्स-फ्री है। इसके लिए सभी बिलों का जरूरत होगी।
अन्य अनुलाभ: आपको नियमित वेतन के अलावा कुछ अन्य लाभ भी मिलते हैं। ये आमतौर पर आवास, कार और रियायती लोन के रूप में हो सकते हैं। इन सभी को आपके वेतन में जोड़ा जाता है और सामान्य स्लैब में टैक्स की गणना की जाती है। आपके नियोक्ता द्वारा दिए गए ग्रुप मेडिकल और टर्म इंश्योरेंस टैक्स के दायरे में नहीं आते। बहरहाल, आपको इनकी गणना करने की जरूरत नहीं। आपका नियोक्ता आपको फार्म 12बीए देगा जिसमें आपको मिलने वाले इन लाभों को आपके वेतन के रूप में दर्शाया जाएगा।

मकान सम्पत्ति से आय

आपकी किसी आवासीय या कमर्शियल प्रॉपर्टी से होने वाली किराये की आय टैक्सयोग्य है। आपके पास एक से ज्यादा प्रॉपर्टी है और एक में आप खुद रहते हैं और यदि दूसरी प्रॉपर्टी किराये पर नहीं है तो उसे भी ऐसा ही माना जाएगा और प्रॉपर्टी की वार्षिक वैल्यू के आधार पर किराया लगाया जाएगा और उस पर टैक्स की देनदारी बनेगी। प्रेफ्रेंशियल ट्रीटमेंट उस मकान को दी जाएगी जिसमें खुद रह रहे हैं। उसकी वार्षिक वैल्यू शून्य होगी। होम लोन पर दिए गए ब्याज पर हर वर्ष 1.5 लाख तक कटौती की जा सकती है।

कैपिटल गेन्स से होने वाली आय

मान लीजिए आपने पिछले साल किस तरह का कैपिटल गेन हासिल किया था। यदि आपने रियल एस्टेट को कम से कम 36 महीने तक रखा है तो इसे लांग टर्म एसेट माना जाएगा। यदि इससे कम अवधि है तो इसे शार्ट टर्म एसेट माना जाएगा। बहरहाल, शेयर और इक्विटी म्यूचुअल फंड को यदि आप एक वर्ष या उससे कम अवधि के लिए रखते हैं तो उन्हें शार्ट टर्म एसेट माना जाएगा। इससे ज्यादा अवधि होने पर लांग टर्म एसेट माना जाएगा। शार्ट टर्म कैपिटल गेन्स को आपकी कुल आय में जोड़ा जाता है और जिस स्लैब में आपकी आय आती है उसमें टैक्स लगाया जाता है। लिस्टिड सिक्यूरीटीज को छोड़ सभी अन्य एसेट कैटेगरी से होने वाले लांग टर्म कैपिटल गेन्स पर इंडेक्सेशन के साथ 20 प्रतिशत की दर से टैक्स लगाया जाता है। शेयर या इक्विटी म्यूचुअल फंड्स से होने वाले लाभ लांग टर्म में टैक्स फ्री हैं। शार्ट टर्म में इन गेन्स पर 15 फीसदी की दर से टैक्स लगता है साथ ही इन पर सिक्यूरीटीज ट्रांजेक्शन टैक्स भी दिया गया हो।

 

बिजनेस/प्रोफेशन से आय

किसी बिजनेस या प्रोफेशन से होने वाली आय को उस व्यवसाय को चलाने में होने वाले खर्च और उससे होने वाली कुल आमदनी में से घटाकर शेष राशि पर टैक्स लगाया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति किसी तरह का प्रोफेशन कर रहा है जैसे लॉ, मेडिसिन, इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर और उससे हर साल 1.5 लाख रुपये से ऊपर प्राप्ति होती है तो उसके लिए एकाउंट्स बुक्स तैयार करनी होंगी।


अन्य स्त्रोतों से आय

सामान्यत: जो आय उपरोक्त चार शीर्षकों के अधीन नहीं आती वह इस खाते में गिनी जाती हैं। उदाहरण के तौर पर इसके तहत बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट, बचत खाते तथा नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट्स पर अर्जित ब्याज आता है। अब आपके पास सभी आंकड़ें मौजूद हैं तो आप अपनी टैक्स रिटर्न भरने की कवायद शुरू कर सकते हैं।

कुछ दिक्कतें ऐसी भी

टैक्स रिटर्न फॉर्म भरते समय कुछ व्यावहारिक दिक्कतें आती हैं। उनसे निजात पाने के कुछ उपाय।
बीमार हैं या मुल्क से बाहर
दोनों ही स्थितियों में कोई व्यक्ति जिसे पावर ऑफ एटॉर्नी हासिल है, आपके स्थान पर टैक्स जमा कर सकता है। हालांकि पावर ऑफ एटॉर्नी का प्रूफ आपको आयकर विभाग में जमा करना पड़ता है।
 
रिटर्न में बदलाव

अगर आपने फॉर्म में कुछ गलती कर दी या कुछ भरना भूल गए, तो आप अगले निर्धारण वर्ष (31 मार्च, 2011) तक रिवाइज्ड रिटर्न फाइल कर सकते हैं। रिवाइज्ड रिटर्न में आपको ओरिजनल फॉर्म जमा करने का पावती नंबर और ओरिजनल रिटर्न जमा करने की तारीख के बारे में बताना होगा।


अगर जमा नहीं किया तो.

अगर आपने पहले निर्धारण वर्ष का रिटर्न फाइल नहीं किया, तो आप वर्तमान निर्धारण वर्ष के खत्म होने तक अपना रिटर्न जमा कर सकते हैं। अगर निर्धात्री ऑफिसर आपके देर से रिटर्न जमा करने के जवाब से संतुष्ट नहीं है, तो वह आप पर पांच हजार रुपए तक की पैनाल्टी लगा सकता है।

रिटर्न फाइल करने से पहले.

अगर टैक्स अदाकर्ता की रिटर्न फाइल करने से पहले मृत्यु हो गई है, तो उसका कानूनी उत्तराधिकारी रिटर्न फाइल कर सकता है। जहां पर टैक्स पेयर का नाम पूछा जाए, आप वहां पर ‘लेट’ लिख दें। रिटर्न के साथ डेथ सर्टिफिकेट की एक कॉपी जमा कर दें और मृत व्यक्ति का परमानेंट अकाउंट नंबर (पेन) कार्ड समर्पण कर दें। मृत्यु से पहले तक उसके द्वारा कमाई गई आय टैक्स के दायरे में आएगी।

अगर टीडीएस या फॉर्म 16 में गलत पेन नंबर लिखा है

आप अपनी कंपनी या टीडीएस प्रोवाइडर से सही पेन नंबर वाला रिवाइज्ड सर्टिफिकेट जारी करने को कहें। अगर यह समय से नहीं हो पा रहा है, तो आप क्षेत्र के निर्धात्री ऑफिसर से संपर्क कर सकते हैं। थोड़े से सत्यापन के बाद वह आपको टैक्स जमा करने का क्रेडिट प्रदान कर देगा।

तैयारी डेस्क

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