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सरकार ने पल्ला झाड़ा,25 की बोर्ड बैठक पर नजर

जीडीए की चिरप्रतीक्षित मधुबन-बापूधाम आवासीय योजना से प्रभावित ढाई सौ खातेदारों के तकरीबन डेढ़ हजार किसानों की बल्ले-बल्ले हो सकती है। बशर्ते, बोर्ड बैठक में सदस्यों ने उसपर मुहर लगा दी। अगर ऐसा होता है तो किसानों को जमीन अधिग्रहण के बदले मुआवजा के अलावा पांच की बजाए छह फीसदी जमीन प्राधिकरण को डवलप करके देनी होगी। जीडीए की मानें तो लगभग 75 फीसदी किसानों ने सर्वाधिक 1100 रूपए की दर से मुआवजा उठाने के बाद पांच की बजाए छह फीसदी जमीन डवलप कर लौटानें की मांग पर अड़े हैं। किसानों के अड़ जाने के बाद प्राधिकरण के पास कोई चारा नहीं था।

लिहाजा प्राधिकरण ने किसानों के प्रस्ताव को मंजूरी हेतु प्रस्ताव शासन को भेज दिया था। शासन ने इस प्रस्ताव से पल्ला झाड़ लिया और यह कहते हुए प्रस्ताव को वापस कर दिया कि चूंकि सदरपुर समेत पांच गांवों के प्रभावित किसानों के जमीन अधिग्रहण के मामले में प्रतिकर का दर मंडलायुक्त की अध्यक्षता वाली कमेटी द्वारा ही तय किया गया था,लिहाज जमीन लौटाने के प्रस्ताव पर निर्णय भी बोर्ड में तय कर लिया जाए। सदरपुर समेत पांच गांवों की 1234 एकड़ जमीन एक्वायर होनी है इसमें से तीन चौथाई जमीन कब्जे में आने के बाद जीडीए आंशिक रूप से आवासीय योजना लांच भी कर चुका है। जीडीए उपाध्यक्ष रामबहादुर ने बताया कि शासन से प्रस्ताव आ गया है। अब इसे बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। 25 जुलाई को बोर्ड बैठक में किसानों के मुद्दे के प्रस्ताव बनाकर रखा जाएगा।


वैसे जानकार बताते हैं कि सर्वाधिक मुआवजा देने के बाद पांच की बजाए छह फीसदी जमीन विकसित कर देने के मुद्दे पर सहमति आसानी से नहीं बन सकती। बता दें कि 1100 रूपए वर्गमीटर की दर से मुआवजा दर तय होने के बाद ही प्रदेश के कई विकास प्राधिकरणों,आवास विकास यहां तक कि धनाढय नोएडा व ग्रेटर नोएडा के ओद्यौगिक प्राधिकरण के अधिकारी भौंचक्के रह गए थे।

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