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जिसे पुचकारती थी, अब मारती है

अंधा भी देख सकता है कि हमारी सरकार ने नक्सलियों के प्रति किस कदर तुष्टिकरण की नीति अपना रखी है। नक्सलियों ने अकेले छत्तीसगढ़ में ही हजारों सीआरपीएफ जवानों को भी मौत की नींद सुलाया है। परंतु हमारी सरकार कानों में तेल डाले बैठी है। एक जांबाज, निडर और कत्तर्व्यपरायण अधिकारी चौबे जी को हमारी हार्दिक श्रद्धांजलि और उनके परिवारवालों के लिए एक असहायसांत्वना।

विनोद कुमार शुक्ला, तिमारपुर, दिल्ली

.. ताकि भरी रहे थाली

हिन्दुस्तान, में सस्ती खरीददारी के टिप्स गिनाए गए थे। काफी फायदेमंद हैं बचत करने के लिए। परंतु कुछ टिप्स ऐसे थे जो खरीददारी में महंगे हो सकते हैं। जैसे होलसेल बाजार जाने के लिए, घर से बीस किमी. का सफर तय करे और बचत के साथ-साथ पेट्रोल भी फूंक कर आएं। शाम को खरीददारी करने पर आपको छंटी-छंटाई सब्जी मिलेगी। इससे तो अच्छा होगा कि इच्छा न होते हुए भी आप जेजे कालोनी में नाम पर रूमाल लगा कर जाएं।

राजेन्द्र कुमार सिंह, रोहिणी, दिल्ली

बेचारे बैंककर्मी

हिन्दुस्तान में जाली नोटों से संबंधित समाचार प्रकाशित हुआ है। इस संबंध में बैककर्मी सबसे ज्यादा चिंतनीय स्थिति में हैं। ये जालीनोट अब एकदम असली के जैसे बनने लगे हैं तथा उनको पकड़ना आसान काम नहीं है। बैंकों के खंजाचियों के पास एक दिन में लाखों रुपए की नकदी आती है। उनसे कैसे यह उम्मीद की जा सकती है कि वे एक-एक नोट को इतने ध्यान से देखें। बैंक में जालीनोट पाए जाने पर खजांची के विरुद्ध एक एफआईआर लिखवा दी जाती है।

सुनीता मोगा, दिल्ली

जरूरत है ‘रोशनी’ की

खबर छपी है कि हरियाणा के महेन्द्रगढ़ जिले के कोयल खुर्द की सरपंच रोशनी देवी को शराबबंदी के लिए राष्ट्रपति जी ने सम्मानितकिया। उधर खबर छपी कि गुजरात में जहरीली शराब के पीने से मरने वालों की संख्या रोजाना बढ़ती जा रही है। पुलिस ने जहरीलीशराब कांड के शूत्रधार की पहचान कर ली है। मगर यह कैसे मान लिया जाए कि यह जहर का धंधा पुलिस-पॉलिटिशियन की जानकारी के बगैर चल रहा था? 

डॉ. आर. के. मल्होत्रा, नई दिल्ली

पर्यावरण की उपेक्षा

हाल ही में प्रस्तुत केन्द्रीय बजट 2009-10 में पर्यावरण पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया है। हिमालयन ग्लेशियर्स को बचाने, गिरते भूमिगत जल के स्तर को रोकने एवं वन विस्तार हेतु बजट में कहीं स्पष्ट उल्लेख नहीं है। केन्द्रीय पर्यावरण एवं वनमंत्री जयराम रमेश ने लोकसभा में बताया कि गंगोत्री ग्लेशियर 18.80 मीटर की दर से प्रतिवर्ष सिकुड़ रहा है।

डॉ. ओ. पी. जोशी, इंदौर

बादल नहीं बरसा?

कहां गई वो मूसलाधार वर्षा?
इसके लिए मन तरसा
सोचो! क्यों बादल
नहीं बरसा?

वीरेन कल्याणी, शाहदरा, दिल्ली

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