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वकीलों की हड़ताल प्रशासन की निष्क्रियता का नतीजा : हाईकोर्ट

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में अधिवक्ताओं पर हुए लाठीचार्ज की घटना को गम्भीरता से लिया है। अदालत ने शुक्रवार को इस संदर्भ में कहा कि प्रशासन द्वारा उचित कार्यवाही न किए जाने की वजह से समाज का एक वर्ग आन्दोलित हो गया।

अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से विरत रहने के निर्णय के फलस्वरूप हाईकोर्ट, प्रदेश की 71 जिला अदालतों के साथ-साथ अन्य न्यायालयों में न्यायिक कार्य प्रभावित हुआ। इससे जहाँ लोगों को परेशानी हुई, वहीं करोड़ों का नुकसान भी हुआ। यदि समाज का एक वर्ग प्रशासन द्वारा उचित कार्यवाही न करने पर हड़ताल कर रहा है, ऐसे में राज्य सरकार को मामले की जाँच कराकर उचित कदम उठाना चाहिए। इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार, बार कौंसिल ऑफ इण्डिया, उत्तर प्रदेश बार कौंसिल को नोटिस जारी किया है।

न्यायमूर्ति सुनील अम्बवानी एवं न्यायमूर्ति रणविजय सिंह की खण्डपीठ ने अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से विरत रहने पर स्वप्रेरित होकर यह आदेश पारित किया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को यह बताने को कहा है कि क्यों न उसे उचित कार्यवाही करने का निर्देश दिया जाए। कोर्ट ने बार कौंसिल को भी यह बताने को कहा है कि क्यों न उनका हड़ताल सम्बन्धी प्रस्ताव रद किया जाए।

कोर्ट ने इस मामले से सम्बन्धित पत्रावली को केस के रूप में पंजीकृत करने का रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया है। साथ ही इस मामले पर सुनवाई के लिए पीठ गठित करने के लिए मुख्य न्यायाधीश को संदर्भित कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने अधिवक्ताओं के हड़ताल करने पर रोक लगा रखी है। बार कौंसिल एक वैधानिक संस्था है। उसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन करना चाहिए।

ज्ञातव्य है कि गोण्डा, कानपुर, इलाहाबाद आदि जिलों में पिछले कुछ महीनों में अधिवक्ताओं पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज पर अब तक प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही न करने के कारण उत्तर प्रदेश बार कौंसिल ने शुक्रवार को एक दिन न्यायिक कार्य से विरत रहने की अपील की थी।

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने भी इसका समर्थन किया था। इसपर अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहे। इसका स्वत: संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने यह आदेश पारित किया है।

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  • Web Title:राज्य सरकार एवं बार कौंसिलों को नोटिस जारी