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कार्यसमिति के गठन और नियमित अध्यक्ष की नियुक्ति पर विचार-मंत्री

राज्य की पांच भाषायी अकादमियों में से सिर्फ तीन में ही स्थायी अध्यक्ष हैं। पांच अकादमियों का काम प्रभारी अध्यक्षों के जिम्मे है। मानव संसाधन विकास मंत्री हरिनारायण सिंह ने शुक्रवार को विधान परिषद में ताराकांत झा के अल्पसूचित प्रश्न के जवाब में कहा कि भाषायी अकादमियों की कार्य समिति के गठन और नियमित अध्यक्ष की नियुक्ति पर राज्य सरकार विचार कर रही है।

मंत्री ने कहा कि राज्य में सात भाषायी अकादमी हैं। इनमें मैथिली अकादमी, भोजपुरी अकादमी, मगही अकादमी, संस्कृत अकादमी , बांग्ला अकादमी, हिन्दी ग्रंथ अकादमी और दक्षिण भारतीय भाषा संस्थान शामिल हैं। हिन्दी ग्रंथ अकादमी, संस्कृत अकादमी और बांग्ला अकादमी के अध्यक्ष पहले से नियुक्त हैं।

अन्य अकादमियों में प्रभारी अध्यक्ष हैं। मंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्षो में योजना और गैर योजना के तहत अनुदान के रूप में अकादमियों को कुल 3,28,45,000 रुपए स्वीकृत किए गए हैं। अकादमियों ने कुल 3,22,04,240 रुपए खर्च की रिपोर्ट दी है। मंत्री ने कहा कि हिन्दी ग्रंथ अकादमी से 22 पुस्तकों और मैथिली अकादमी से 15 पुस्तकों का प्रकाशन किया गया है।

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  • Web Title:सात भाषायी अकादमियों में से सिर्फ तीन में स्थायी अध्यक्ष