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मानसून ब्रेक

मानसून ब्रेक

गोवा
गोवा हनीमून पैराडाइज है, पर मानसून में तो वह खुद हनीमून मनाता है। उसके तट धुले-से नजर आते हैं, जब वहां बारिश उसके 100 किलोमीटर लंबी कोस्ट लाइन के साथ रोमांस करती है। यहां का जल प्रपात, जो नेशनल पार्क के किनारे है, मानसून के दौरान बडम रोमांचक लगता है। बेहद ऊंचाई से गिरने वाले इस जलप्रपात की धार ऐसी लगती है, जैसे गिर कर धरती का सीना चीर देगी। जब बारिश थमी हो, तब सेवॉय में मसालों की खेती देखने के लिए पौडा के घने जंगलों और पहाडिम्यों से गुजर कर जाना अपने आप में एक अनुभव है। मानसून के दौरान गोवा में अनेक उत्सव होते है। टाइनी दीवार द्वीप में होने वाला बौन्डेराम फ्लैग फेस्टिवल देखने योग्य है। बीच पर बने रेस्तरां इस दौरान खचाखच भरे रहते हैं। कैलनग्यूट का लॉयटान तेज फुहारों के आनंद के लिए सबसे खूबसूरत जगह है।

लेह
समुद्र तट से 11,500 फुट की ऊंचाई पर सिंधु घाटी के करीब बसा लेह भी इस मौसम का ही पड़ाव है। विश्व की दो सबसे बड़ी पर्वत श्रंखलाओं और एलपाइन मरुस्थल से घिरा लेह का सूखा उजड़ा-सा लैंडस्केप इस मौसम में उमंगों से भर जाता है। यहां ऐतिहासिक बौद्ध मठों का जमावड़ा है, जिनके तीखे रंग भारी बारिश में नहा कर और गहरे हो जाते हैं। दिल्ली से लेह के लिए नियमित हवाई सेवा है। लद्दाख में भारत के और हिस्सों की तरह बादल नहीं घुमडम्ते, इसलिए यहां आने के लिए मानसून से अच्छा मौसम कोई नहीं है। यहां के बौद्ध मठ, ऐतिहासिक स्मारक, 800 साल पुराना काली मंदिर, 17वीं शताब्दी का लेह मंदिर पर्यटकों से भरे नजर आते हैं। लद्दाख के सबसे समृद्ध, पुरातन और सबसे महत्त्वपूर्ण मठ हेमिस गोम्पा के तो कहने ही क्या। इसके अलावा लेह का एडवेंचर टूरिज्म भी बहुत लोकप्रिय है। जुलाई-अगस्त में सिंधु नदी पर व्हाइट वॉटर राफ्टिंग होती है। यूं इसे शयोक नदी और जन्सकार नदी पर भी किया जा सकता है। नूब्रा घाटी में कैमल सफारी को भी पर्यटक बहुत पसंद करते हैं।

पेरियार नेशनल पार्क
भारत के और नेशनल पार्को से विपरीत पेरियार साल भर खुला रहता है। मानसून में वहां के पेड़-पौधे बारिश से नहाते हैं और उनमें से एक अजीब-सी गंध उठती है, जो सैलानियों को जैसे सम्मोहित-सा कर लेती है। हालांकि इस दौरान वन्यजीव वहां कम दिखाई देते हैं, क्योंकि पानी की तलाश में उन्हें बाहर आने की जरूरत नहीं पडम्ती। ये ऐसे कुछेक नेशनल पार्को में से है, जो मानसून में खुला रहता है। इस पूरे मौसम में यहां नौका विहार कर सकते हैं, बशर्ते मूसलाधार बारिश न हो रही हो। इस दौरान लॉन्ग ट्रेकिंग पर भी जाते हैं, पर अच्छा होगा कि उससे पहले जोंक प्रूफ जुराबें पहन लें। पेरियार में केवल बोट सफारी की जाती है। सूर्यास्त के समय इस पर बैठकर डूबते सूरज को निहारना अनूठा अनुभव होता है। पेरियार जाने के लिए तमिलनाडु का मादुरी और केरल का कोच्चि निकटतम हवाई अड्डा है।


उत्तराखंड की फूलों की घाटी मानसून की पहली फुहार के साथ ही जैसे जी उठती है। बर्फ से सराबोर पर्वतों की चोटियां और घाटी में बिखरे 300 किस्मों के एल्पाइन फूल, ऐसा लगता है मानो किसी ने रंगों की बारिश कर दी हो। जोशीमठ से 10 घंटे की ड्राइव गोविंद घाट पहुंचाती है। वहां से 13 कि.मी. का ट्रैक घांघरिया तक जाता है और वहां से 3 किलोमीटर बाद शुरू होता है फूलों का यह पडमव। यूं यहां अप्रैल से अक्तूबर तक जा सकते हैं, पर सबसे अच्छा समय जुलाई से अगस्त के बीच का होता है, जब मानसून की पहली फुहार के साथ वहां के समूचे फूल ऐसे लहलहा उठते हैं,  मानो सुबह होने के बाद उन्होंने उठ कर अंगड़ाई ली हो। घांघरिया से घाटी के रास्ते में फूल-पत्तियों की इतनी किस्में नजर आती हैं, जो शायद किसी ने जीवन भर में न देखी हों। वहां कपड़े में पैक होकर जाना पड़ता है, क्योंकि कभी भी बादल फट पड़ते हैं और आप तरबतर हो जाते हैं। इस मौसम में हेमकुंड जाने वाले सैलानियों का भी वहां तांता लगा रहता है।

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