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सोनिया का खेद मजबूरी, रीता को माफी नहीं: मायावती

सोनिया का खेद मजबूरी, रीता को माफी नहीं: मायावती

मायावती ने शुक्रवार को कहा कि सोनिया गांधी के बयान के बाद उन्होंने पार्टी के सांसदों से इस मुद्दे पर संसद के दोनों सदनों में शांति बनाए रखने के लिए कह दिया है। उन्होंने कहा कि बावजूद इसके डॉ.जोशी को माफ नहीं किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने अपने खिलाफ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी की टिप्पणी के विरोध में उतरे गैर बहुजन समाज पार्टी (बसपाई) नेताओं का शुक्रवार को आभार व्यक्त किया पर यह भी कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का खेद सम्बन्धी बयान मजबूरी में दिया गया है।

मायावती ने लखनऊ में पत्रकारों से कहा कि डा. रीता जोशी की उनके सम्बन्ध में की गई अभद्र टिप्पणी को लेकर सोनिया गांधी का बयान मजबूरी में आया है।

उनका कहना था कि गुरुवार को उन्होंने कहा था कि सोनिया गांधी की चुप्पी से साबित होता है कि डा.जोशी की अभद्र टिप्पणी कांग्रेस हाईकमान के इशारे पर की गई है। इसके बाद सोनिया को दलितों में अपनी गिरती हुई साख को देखते हुए मजबूरन खेद सम्बन्धी बयान देना पड़ा है।

मायावती ने कहा कि सोनिया गांधी के बयान के बाद उन्होंने अपनी पार्टी के सांसदों से इस मुद्दे पर संसद के दोनों सदनों में शांति बनाए रखने के लिए कह दिया है। उन्होंने कहा कि बावजूद इसके डा.जोशी को माफ नहीं किया जाएगा। कानूनी कार्रवाई यथावत चलती रहेगी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद वरुण गांधी की तरह उन्हें भी हो सकता है जमानत मिल जाए लेकिन इससे अपराध कम नहीं होता है। देर सबेर कानून जरूर सजा देगा।

उन्होंने कांग्रेसियों को चेताया कि डा.जोशी के घटिया बयान को दबाने के लिए कानून हाथ में न लें नहीं तो उपद्रवियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मुरादाबाद की घटना को दबाने के लिए कुछ जगहों पर धरना प्रदर्शन किए गए इसका मतलब यह नहीं लगाना चाहिए कि बसपा कार्यकर्ता कमजोर है। उनके कार्यकर्ताओं में अभी भी आक्रोश है लेकिन उन्होंने सबसे शांति बनाए रखने की अपील की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह कांग्रेसी सड़कों पर उतरे उसी तरह यदि बसपा कार्यकर्ता सड़कों पर उतरते तो उत्तर राज्य ही नहीं पूरे देश की कानून व्यवस्था खराब होती है और दोनों जगहों पर राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ सकता था। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों में विभिन्न मुद्दों राय देना लोकतंत्र का परिचायक है लेकिन अभद्र टिप्पणी लोकतांत्रिक व्यवस्था के हक में नहीं है।

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