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अफसर जानते नहीं, दाइयां सीखेंगी कंप्यूटर

डीएम दफ्तर में कंप्यूटर का पता नहीं, अफसरों को कंप्यूटर ऑपरेट करना आता नहीं, लेकिन जनपद की दाइयां (स्वास्थ्यकर्मी) कंप्यूटर माउस पर हाथ भी फिराएंगी और जन्म लेने वाले बच्चों का विवरण भी अपडेट करेंगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में पैदा होने वाले बच्चों के बारे में विवरण रखने के लिए दाइयों को रजिस्टर रखना पड़ता है। दो या तीन सप्ताह बाद रजिस्टर में लिखे विवरण को दाइयां जिला अस्पताल में रजिस्टर्ड करवाती हैं। इस प्रक्रिया में लोगों को जिला अस्पताल से जन्म प्रमाणपत्र हासिल करने में महीने-दो महीने का समय लग जाता है। जन्म प्रमाणपत्र के लिए लंबी प्रक्रिया से बचने के लिए शासनादेश पर जिले के सभी छह नगर पंचायतों में कप्यूटर लगाया जाएगा। नेटवर्किग के जरिए नगर पंचायतों में लगे कंप्यूटर का ई-सुविधा केंद्र से जोड़ा जाएगा। अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चों के बारे में प्रदेश सरकार के पास पूरा विवरण होता है। लेकिन, ग्रामीण क्षेत्रों के घरों में पैदा होने वाले बच्चों के बारे में सही जानकारी न होने के कारण वे  कई योजनाओं से महरूम रह जाते हैं। ऐसे बच्चों के मामले में भी यह सुविधा काम आएगी।


नगर पंचायतों को कंप्यूटर से जोड़ने के बाद प्रतिदिन बच्चों के जन्म का पूरा विवरण दाइयां जिला अस्पताल में देने के बजाय पास के पंचायतों में स्वयं दर्ज कर सकती हैं। कंप्यूटर चलाने के लिए दाईयों को जिला सूचना विज्ञान विभाग द्वारा दाईयों को कंप्यूटर ट्रेनिंग दी जाएगी। जिला सूचना विज्ञान अधिकारी पवन मंगल के अनुसार ग्रामीण इलाकों में कार्यरत दाइयों की सूची बनाई ज रही है। सूची तैयार होने के बाद शिफ्टों में दाइयों को ट्रेनिंग दी जाएगी।  इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित स्वास्थ्य केंद्रो को भी कंप्यूटर से जोड़ने की बात चल रही है।

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