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यूं ही अमेरिका से पंगा नहीं लिया किम ने!

अमेरिका से खुलकर पंगा लेने वाले तीन एशियाई खुद्दार नेताओं - इराक के सद्दाम हुसैन, ईरान के महमूद अहमदीनेजद और उत्तर कोरिया के किम जोंग-इल की वजह से जॉर्ज बुश इन देशों को ‘एक्सिस ऑफ इविल’ कहते थे। सद्दाम निपट गए, अहमदीनेजद एक बार फिर खम ठोककर चुनाव जीत आए हैं, और अब ऐसा लगता है कि किम जोंग-इल के कैंसर से मर जने की मन्नत मांगी जा रही है। किम का जीवन वाकई रहस्यमय है। कोई कहता है किम इल-सुंग का ये बेटा तत्कालीन सोवियत संघ के व्यात्सकोए में 16 फरवरी 1941 को पैदा हुआ, तो  कोई कहता है कोरिया के बैक्दू माउंटेन इलाके में 1942 में। लेकिन इस वक्त किम उ. कोरिया के सर्वोच्च नेता हैं। 1994 में किम इल-सुंग की मौत के बाद वर्कर्स पार्टी की कमान संभालने वाले किम जोंग-इल को उनके मुल्क में हर कोई ‘प्रिय नेता’ के नाम से पुकारता है।

माना जाता है कि 1948 में जब कोरिया को जापान से आजादी मिलने के बाद उनका परिवार सोवियत संघ से कोरिया आ गया था, तो 6-7 साल के किम ने अपने भाई को धक्का देकर पूल में डुबो दिया था। एक साल बाद डिलीवरी के वक्त किम की मां की भी मौत हो गई थी। लेकिन कहा जाता है कि उन्हें गोली मारकर मरने के लिए छोड़ दिया गया था।

किम की अधिकृत जीवनी के अनुसार उनकी पढ़ाई-लिखाई 1950 से 1960 के बीच प्योंगयांग के प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में हुई थी। लेकिन कहा जाता है कि असल में किम को पढ़ने के लिए चीन भेज दिया गया था, जहां उन्होंने यूनियनबाजी और सियासत ज्यादा की। मार्क्स की राजनीति और साहित्य में किम के रुझान को देखते हुए उन्हें मिडिल स्कूल में ही यूथ लीग का उपाध्यक्ष बना दिया गया था। जवानी के दिनों में किम की दिलचस्पी संगीत, खेतीबाड़ी और गाड़ियों की मरम्मत करने में रही।

किम ने 1964 में किम इल-सुंग यूनिवर्सिटी से मार्क्सवादी राजनीतिक अर्थशास्त्र में बीए की डिग्री दर्शनशास्त्र और सैन्य विज्ञान जैसे विषयों के साथ ली, और कपड़ा मिल की मशीनरी और टीवी प्रसारण उपकरण बनाने का काम भी सीखा। वैसे 1961 में ही वे वर्कर्स पार्टी में पिता का हाथ बंटाने लगे थे। कहा जाता है कि सत्तर के दशक में माल्टा जकर किम ने अंग्रेजी भाषा भी सीखी थी। पिता की मौत के बाद 1994 में सत्ता संभालने के बाद किम उस वक्त अमेरिका की आंख की किरकिरी बन गए, जब 1998 में उत्तर और दक्षिण कोरिया के पुन: एकीकरण के मकसद से दक्षिण कोरिया द्वारा शुरू की गई सनशाइन पॉलिसी के तहत उन्होंने परमाणु कार्यक्रम बंद करने और आर्थिक नीतियों में बदलाव करने से मना कर दिया। 2006 में किम ने भूमिगत परमाणु परीक्षण करके अमेरिका को आगबबूला कर दिया। किम जोंग-इल पर रंगून में बम विस्फोट करके 17 द. कोरियाई अधिकारियों की हत्या करने, कोरियन एयरलाइंस के विमान को बम से उड़ाकर 115 लोगों की हत्या करने, हजारों असहमत बेकसूरों को जेल में ठूसने और मानवाधिकार हनन के आरोप हैं। किम को एशिया के पांच सबसे खतरनाक तानाशाहों में टॉप पर माना जाता है।

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