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फासले और तब्दीली

किसी भी नई नौकरी को हासिल करने के लिए आप जो सीवी भेजते हैं, अगर उसमें आपने बार-बार कुछ समय तक बेरोजगार रहने या थोड़े-थोड़े अंतराल पर कई नौकरियां करने का जिक्र किया है, तो सावधान हो जाइए। इसे देखकर नियोक्ता कंपनी के कान खड़े हो सकते हैं, और वह आपको नियुक्त करने से पहले सौ बार सोचने को मजबूर हो सकती है। ऐसी स्थिति से निपटने के कुछ उपाय आज हम आपको बता रहे हैं।

बार-बार नौकरी बदलने के पीछे राज क्या है? इस सवाल का जवाब देते समय कभी भी अटकना नहीं चाहिए। ऐसा कभी न कहें कि बॉस से पटरी नहीं बैठ रही थी या कंपनी ठीक नहीं थी। इसके बजाय ऐसी वजह बताएं, जिसमें आपकी बेबसी झलकती हो। जैसे कि कंपनी की वित्तीय स्थिति या विलय के कारण नौकरी छोड़नी पड़ी।

अपने सीवी में नौकरियों की लिस्ट ‘मार्च-2008 से अक्टूबर-2008 तक कंपनी ए में’ और ‘नवंबर-2008 से जनवरी-2009 तक कंपनी बी में’ के बजाय ‘2008- कंपनी ए’ और ‘2009- कंपनी सी’ शैली में दें।

बजाय ये बताने के कि आप किन-किन कंपनियों में रहे, ये बताएं कि किस कंपनी में क्या विशेष कार्यानुभव प्राप्त किया।
जिस कंपनी में ज्यादा वक्त बिताया, उसके बारे में जोश के साथ बात करें, और बताएं कि आपकी कंपनी भी वैसी ही है, और आप स्थायित्व के इरादे से यहां आना चाहते हैं।

अगर आप किसी अंतराल में खाली रहे, तो सच-सच बता दें कि आपको पारिवारिक कारणों से ब्रेक की जरूरत थी, या कि आपको मंदी की वजह से खाली रहना पड़ा। फिर सकारात्मक सोच के साथ कहिए कि इसमें भी आपका हित ही था, तभी तो अब इतनी अच्छी कंपनी में आने का मौका मिल रहा है।  
 

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  • Web Title:फासले और तब्दीली