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पिंकी दीदी ने बदल दी इस स्कूल की तस्वीर

यूपी-मिर्जापुर के एक छोटे से गांव की पिंकी बेहतर काम कर आस्कर ले आयी लेकिन फिर वह मुफलिसी की जिंदगी में लौट गई। बिहार के इस पिंकी ने अपनी जिद और जुनून से इलाके के बदहाल एक स्कूल की सूरत ही बदल दी। पिंकी को इसके लिए कोई ‘आस्कर’ जैसा तमगा तो नहीं मिला लेकिन वह खुश है कि यह स्कूल आज ‘ए ग्रेड’ हासिल कर चुका है और अपनी चमक-दमक और धमक के कारण न सिर्फ जिले बल्कि राज्य में अलग पहचान बना चुका है।

यह अलग बात है कि यह पिंकी भी आज तक मुफलिसी में ही है लेकिन खुश है अपनी मेहनत का परिणाम देखकर। सन्हौला प्रखंड का अरार स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय भी अन्य कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के तरह ही था। इसकी रफ्तार भी वैसी ही थी जैसी सरकारी स्कूलों की होती है लेकिन एक संयोजिका की दृढ़इच्छाशक्ति और ग्रामीणों से बेहतर तालमेल की बदौलत इस स्कूल की तस्वीर ही बदल गई।

आज यह जिले का ‘ए’ ग्रेड का स्कूल है। यहां स्कूल का चमचमाता भवन भी है, चारदीवारी भी। बोरिंग भी और बिजली भी। न केवल जिला बल्कि पूरे राज्य में इस स्कूल की अलग पहचान है। यह सब संयोजिका पिंकी के कारण हो पाया। मजे की बात यह है कि पिंकी कस्तूरबा स्कूल सन्हौला में किसी पद पर नहीं हैं। वह तो संकुल संसाधन केन्द्र (सीआरसी) सनोखर मिडिल स्कूल की संयोजिका हैं।

लेकिन दिनभर संकुल के काम से क्षेत्र में और शाम होते ही बच्चियों के बीच हाजिर। बच्चियां इन्हें दीदी कहकर पुकारती हैं..पिंकी दीदी। गांववाले ही नहीं विभाग भी मानता है कि अगर वह इस स्कूल की बागडोर न संभालती तो शायद यह स्कूल इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाता। हरदम, हरपल बच्चियों की पढ़ाई और उसके भविष्य की चिंता, यह पिंकी का जुनून है।

 

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