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तमिलनाडु: नहीं होगी फोर्ट सेंट जॉर्ज में राजनीति

कुछ ही महीनों में फोर्ट सेंट जॉर्ज इतिहास हो जाएगा। अभी यहां तमिलनाडु विधानसभा का प्रशासनिक मुख्यालय है, पर अगलेसाल विधानसभा नई इमारत में चली जाएगी। विधानसभा परिसर का काम मार्च 2010 तक पूरा हो जएगा और 2010-11 का बजटसत्र नई इमारत में संपन्न होगा। यह कांप्लेक्स ओमानदुरार एस्टेट में बन रहा है जो कि चेपक इलाके में सरकारी गेस्ट हाउस परिसर है।

विधानसभा की नई इमारत में भूतल के अलावा  सात तल और होंगे। इस नए ब्लॉक में 279.56 करोड़ रुपए की लागत से 73,399 वर्ग मीटर का निर्माण किया गया है। इसमें दो ब्लॉकों के बीच बना लिंक ब्लॉक भी शामिल है। विधानसभा के हाल में 300 सदस्यों के बैठने की जगह होगी जबकि अभी फोर्ट सेंट जॉर्ज के हॉल में महज 234 सदस्य ही बैठ सकते हैं। नई विधानसभा का निर्माण जर्मन वास्तुविद जरकन, मार्ग और पार्टनर कर रहे हैं। उन्हें अंतरराष्ट्रीय टेंडर मिला था। विधानसभा का नया परिसर शास्त्रीय तमिल परंपरा और शहरी सौंदर्यबोध का मिला-जुला रूप है। जब पिछले साल इस काम के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई थीं तो इसमें 25 वास्तुविदों ने रुचि दिखाई थी। इसमें से नौ का चयन हुआ जिसमें तीन ने डिजाइन प्रस्तुत किया।
इस संरचना की ज्यामितीय संरचना पारंपरिक मंडलाकार से लिया गया है जिसमें 36 समरूपी त्रिभुजों के बीच तमाम वृत्त होंगे।

विधानसभा के हॉल के ऊपर शीशे के गुंबद की संरचना सर्वाधिक दृश्यमान होगी, इस डिजाइन में द्रविड़ मंदिरों की झलक दिखाई पड़ेगी। इस परिसर में एक भीतरी अहाता होगा, जिसमें पांच गोल प्रांगण सार्वजनिक, अर्ध-सार्वजनिक और सुरक्षित इलाके का गठन कर रहे हैं। दाहिनी तरफ स्थित एक खुला नागरिक मंच मंडल का सबसे बड़ा घेरा होगा। तीन अन्य वृत्ताकार प्रांगणों में विधानसभाहॉल, असेंबली चैंबर और सम्मेलन कक्ष स्थित होंगे।

फोर्ट सेंट जॉर्ज के बाहर विधानसभा के चले जाने के बाद लगता है यह धरोहर स्थल पूरी तरह से सैनिक हाथों में चली जाएगी। इस किले में दक्षिणी प्रायद्वीप के विभिन्न स्थलों में तैनाती का इंतजार कर रही सेना के ठहरने के लिए गैरिसन भी है। दरअसल फोर्ट सेंट जॉर्ज आधुनिक भारतीय सेना की जन्मस्थली है। इसी जगह पर मेजर स्ट्रिंगर  लारेंस ने 1747 में उन भारतीयों नागरिकों  की औपचारिक मिलिशिया का गठन किया था जो ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए काम करते थे। यही मिलिशिया 1760 में एक विधिवत सेना बनी। इसकी सात बटालियनें चार विभिन्न केंद्रों में स्थित थीं और वे ही मद्रास सेना की केंद्रीय संरचना थीं। यही बाद में अंग्रेजों के तहत काम करने वाली भारतीय सेना के रूप में विकसित हुई।

फोर्ट सेंट जॉर्ज जो कि तमिलनाडु की राजधानी के पूर्वी तट के कामराजर रोड की सबसे प्रमुख निशानी है , दरअसल मद्रास शहर के विकास की शुरुआत की कहानी कहता है। सत्रहवीं सदी के आरंभ में हमले की आशंका को रोकने के लिए किसी भी व्यापारिक केंद्र की किलेबंदी जरूरी मानी जाती थी। ईस्ट इंडिया कंपनी के दो व्यापारियों को जब कूवम नदी और बंगाल की खाड़ी के बीच जमीन की एक पट्टी मिली तो उन्होंने यही काम किया। इस किले के भीतर अलग-अलग समय में विभिन्न मकसद से अलग-अलग इमारतें बनीं। लेकिन मुख्य ढांचा सेंट जॉर्ज दिवस (23 अप्रैल) के मौके पर पूरा हुआ बताया जता है। इसीलिए किले का नाम सेंट जॉर्ज किला पड़ा। चालीस साल बाद किले के परिसर में एक और महत्वपूर्ण निर्माण किया गया। यह था सेंट मेरी चर्च जो कि भारत का पहलाएंगेलिकन चर्च था। लोककथा के मुताबिक इस बसावट को चेन्नापटनम नाम दिया गया क्योंकि कंपनी को जमीन बेचने वाले धमारला वेंकटप्पा नायक ऐसा चाहते थे। नायक चाहते थे कि इस इलाके का नाम उनके पिता चेन्नप्पा नायक के नाम पर रखा जए। फोर्ट सेंट जॉर्ज भारत के पूर्वी तट पर स्थित सबसे पुराना अंग्रेजी किला है।
इस किले पर सागौन की लकड़ी से बना 150 फुट ऊंचा ध्वज स्तंभ लगा था जिस पर 1947 तक यूनियन जैक फहराता रहा। आज उस लकड़ी के ध्वज स्तंभ की जगह पर धातु के स्तंभ पर तिरंगा फहराता है।
 
कहा जाता है कि सागौन का यह स्तंभ अभी भी देश का सबसे ऊंचा स्तंभ है। जिस मद्रास बैंक के बंगाल बैंक और बांबे बैंक में विलय के बाद  इम्पीरियल बैंक बना और जो बाद में स्टेट बैंक आफ इंडिया में रूपांतरित हुआ, उसका गठन इसी फोर्ट सेंट जॉर्ज में हुआ था।
अगले साल के शुरू में जब यहां से विधानसभा नई जगह पर चली जएगी तब भी फोर्ट सेंट जॉर्ज इस महानगर का प्रमुख पर्यटक स्थल होगा। इसका श्रेय उस संग्रहालय को भी जाता है जो यहां 1948 में खोला गया था। 

radhaviswanath73@yahoo.com
लेखिका वरिष्ठ पत्रकार हैं 

 

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