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लोन मिल गया तो तकदीर बदल लेने का है जज्बा

बड़ी ही हसरतें लेकर युवा जिला उद्योग केंद्र पहुंच रहे हैं। इन दिनों वहां प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत आवेदन पत्र आमंत्रित किए गए हैं।

मोहकमपुर निवासी बीस वर्षीय युवा महेंद्र धागा व ऊन बनाने का काम शुरू करना चाहते हैं। मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने के लिए उन्हें तीन मशीनें चाहिए। इनकी कीमत है 3.24 लाख रुपये। इसके अलावा कुछ पैसा ‘कच्चे माल’ के लिए भी मिल जाए तो उनका धंधा चल सकता है। महेंद्र ने बताया कि दिल्ली की एक पार्टी से बात भी हो गई है। उनका तैयार माल खरीदने के लिए वह तैयार है। जिला उद्योग केंद्र में फॉर्म जमा करने आए महेंद्र ने बताया कि अगर लोन मिल गया तो उनकी तकदीर संवर सकती है।


लक्खीबाग के ब्रिजेंद्र जिम खोलने के लिए लोन लेने आए थे। जिम नहीं चला, तो कहां से लोन चुकाओगे? ब्रिजेंद्र को पूरा भरोसा है कि जिम अच्छा चलेगा। कहते हैं कि उन्होंने ट्रेनिंग ले रखी है। दोस्त के जिम में काम भी किया है। किस व्यक्ति को क्या एक्सरसाइज करने की सलाह देनी चाहिए, उन्हें अच्छी तरह से आता है। आजकल युवाओं में जिम जने का चलन लगातार बढ़ रहा है। मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने की क्यों नहीं सोचते? उसके लिए आसानी से लोन मिल सकता है। ब्रिजेंद्र का जवाब था, चलाना तो जिम है। उन्हें जिम के काम में काफी आत्मविश्वास है। ऐसे धंधे में हाथ नहीं डालना चाहते, जिसमें सफलता हाथ लगने की संभावना कम हो।
महेंद्र और ब्रिजेंद्र की तरह कम से कम सौ युवा अब तक जिला उद्योग केंद्र में ऋण के लिए आवेदन कर चुके हैं। फॉर्म आने का सिलसिला अभी जारी है। इन युवाओं का कहना है कि अगर उन्हें लोन मिल गया, तो नई जिंदगी शुरू कर सकते हैं। तमाम ऐसे आवेदक भी हैं, जो पहले से ही धंधा कर रहे हैं। अपने धंधे को बढ़ाने के लिए उन्हें रोजगार की दरकार है।

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