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फरीदाबाद को फकीराबाद तो न बनाएं

पिछले कुछ वर्षो से फरीदाबाद में बिजली और पानी की समस्या ने विकराल रूप धारण कर लिया है।  एक जिम्मेवार भारतीय होने के नाते मैं ये तो नहीं चाहूंगी कि राष्ट्र की जरूरतों को नजरअंदाज कर हमें बिजली दी जाए, परंतु बिजली की कटौती का समय जरूर इस प्रकार से निर्धारित किया जा सकता है कि आम नागरिक को कम से कम परेशानी हो साथ ही साफ पानी हेतु कोई आवश्यक कदम उठाए जएं ताकि आरओ पर निर्भरता खत्म हो। चौटाला जी आपकी इच्छा पूर्ण हो गई है, फरीदाबाद फकीराबाद बनने की राह पर है।

कल्पना चेतना, फरीदाबाद

पूरक परीक्षाएं शीघ्र हों

मेरा सीबीएसई बोर्ड के अधिकारियों से विनम्र निवेदन है कि वे पूरक परीक्षाओं का आयोजन इस प्रकार करें कि परीक्षा परिणाम हर हाल में 20 जुलाई तक संभव हो सकें। फार्म भरने तथा बोर्ड के कार्यालय में जमा कराने की अंतिम तिथि 10+15=15 दिन के भीतर अर्थात् अधिक से अधिक 15 जून तथा परीक्षा की तिथि जुलाई के प्रथम सप्ताह में 4 या 5 जुलाई तक हों ताकि उपरोक्त तिथि तक परीक्षा परिणाम घोषित किए जा सकें। क्योंकि वर्तमान में जमिया मिल्लिया जैसे संस्थानों में, प्रोविजनल एडमिशन की सुविधा के अभाव में छात्र प्रवेश से वंचित रह जाते हैं और उनका एक साल खराब हो जाता है।

असद अली चाँदपुरी, नई दिल्ली

बड़ा काम किया है

आपने साइंस, आर्ट्स, कॉमर्स, कैमेस्ट्री, हिन्दी, राजनीति विज्ञान, ज्योग्राफी, फिजिक्स, ज्यूलोजी और भी कई कोर्सो की जानकारी छात्राओं को दी। उससे छात्रों के भविष्य के द्वार आपने खोले इसके लिए आपके समाचार पत्र को दोबारा धन्यवाद।

विमल अरोड़ा, डेरावाल, दिल्ली

कूच बिहार क्यों नहीं?

भारत की आजादी के पूर्व, कूच बिहार एक देशी रियासत थी। 26 जनवरी 1949 को विधिवत सी श्रेणी का राज्य भी बनाया गया था और उसका प्रशासन चलाने के लिए एक आयुक्त भी नियुक्त किया गया। लेकिन विडम्बना देखिए कि एक महीने के अंतराल में गुपचुप तरीके से इसे एक जिला बना दिया गया। कूच बिहार एसोसिएशन के सदस्य बबुआ बर्मन ने बताया कि 1949 में कूच बिहार में 25 सदस्यों वाली एक विधानसभा भी चुनी गई थी। जिसमें 24 सदस्य देशी थे। कूच बिहार के नाम पर 18 जून 2005 को हिंसात्मक घटनाएं भी हुई, जिसमें  हजारों लोग घायल हुए, दो की मृत्यु भी हो गई। तीन सरकारी मुलाजिम मारे भी गए थे। कूच बिहार के 57 संघर्षकर्ता अभी भी जेल में हैं। अगर पंजाब से हरियाणा, बिहार से झारखंड, उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड, तो कूच बिहार क्यों नहीं?

सैयद परवेज, नई दिल्ली

सूली पर टंगा ‘गरीब’
बजट कई रंगों में रंगा है
सिर्फ ‘गरीब’ सूली पर टंगा है।

प्रकाश ‘प्रलय’, कटनी, मध्य प्रदेश

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