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उत्तर प्रदेश की आग

उत्तर प्रदेश की दलित, सवर्ण व पिछड़ी जातियां और विभिन्न धार्मिक समूह जिस तरह से स्वाभिमान के आत्मसंघर्ष से गुजर रहे हैं, उसमें रीता बहुगुणा जोशी की जैसी टिप्पणी और उस पर मायावती सरकार और बसपा कार्यकर्ताओं की कठोर और उग्र प्रतिक्रिया की एक आशंका सदैव बनी रहती है। लोकसभा चुनाव में वरुण गांधी ने अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ और अल्पसंख्यक समुदाय के नेता आजम खां ने भी अपनी ही पार्टी की नेता जयाप्रदा के खिलाफ टिप्पणी कर विवाद खड़ा कर दिया था। वरुण गांधी पर राज्य सरकार ने प्रतिक्रिया में रासुका लगा कर जिस तरह कठोर कार्रवाई की, वह अतिरेकपूर्ण थी। बाद में इसे सुप्रीम कोर्ट तक ने माना। कुछ वैसी ही कार्रवाई करते हुए सरकार ने रीता बहुगुणा को न सिर्फ गिरफ्तार किया, बल्कि पुलिस की मौजूदगी में असामाजिक तत्वों द्वारा उनके मकान को आग के हवाले कर दिया गया।

जहिर है ताबड़-तोड़ हुई इस कानूनी और राजनीतिक कार्रवाई से जनता के बीच रीता बहुगुणा का वह अपराध छोटा पड़ गया जो उन्होंने भावावेश में कर दिया था। और वे मायावती की प्रशासनिक गड़बड़ियों के खिलाफ संघर्ष की कांग्रेसी प्रतीक बन गईं। अब दशा यह है कि राज्य सरकार और बसपा के पदाधिकारी एक तरफ मकान जलाए जाने की घटना का दोष कांग्रेसियों पर मढ़ रहे हैं और दूसरी तरफ रीता बहुगुणा की टिप्पणी को सोनिया गांधी के इशारे पर की गई बता रहे हैं। वे इस अपराध को क्षमा करने को कतई तैयार नहीं हैं।

जहिर है सवर्णो ने दलित जातियों का सैकड़ों सालों तक जो अपमान किया उसके लिए उन्हें बार-बार क्षमा मांगनी चाहिए और यह शपथ भी लेनी चाहिए कि वे वैसा कभी नहीं करेंगे। गौर से देखा जाए तो मायावती को मुख्यमंत्री बनवा कर भी सवर्ण कई मौकों पर वैसा कर रहे हैं। लेकिन समाज का सदियों पुराना व्यवहार और राजनीतिक संवाद की भाषा मात्र दो दशक की राजनीति द्वारा बदल जाएगी ऐसी उम्मीद करना बेमानी है। अगर प्रगतिशील पिता की पुत्री और महिला आंदोलन से निकलने वाली नेता ऐसी टिप्पणी कर रही हैं तो साफ है कि समाज का अवचेतन नहीं बदला है और वहां दलित व महिला दोनों के प्रति संवेदनशील नजरिए की कमी साफ दिखती है। सवाल उठता है कि बार-बार जातिवादी, पुरुषवादी और धार्मिक विग्रह में फंस कर उत्तर प्रदेश अपने विकास का मार्ग क्यों अवरुद्ध करता है? स्पष्ट है कि प्रदेश अपनी संकीर्णताओं से मुक्त नहीं हुआ है और बिना वैसा हुए उसके विकास का मार्ग प्रशस्त होता नहीं दिखता। इस मुक्ति की पहल जो करेगा वही सचमुच बड़ा नेता होगा।

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