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प्लेटिनम जुबली वर्ष में पहुंची रणजी ट्राफी

प्लेटिनम जुबली वर्ष में पहुंची रणजी ट्राफी

पैसों की बरसात वाली इंडियन प्रीमियर लीग टवेंटी 20 चैंपियनशिप अब भले ही भारत की लोकप्रिय घरेलू प्रतियोगिता बन गई हो लेकिन वर्षों पुरानी और प्रतिष्ठित रणजी ट्राफी के लिए भी खुशी के अपने कारण है क्योंकि 2009-10 सत्र के साथ ही वह 75वें वर्ष में प्रवेश कर जाएगी।

स्वतंत्रता से पहले शुरू हुई राष्ट्रीय क्रिकेट चैंपियनशिप का यह प्लेटिनम जुबली वर्ष होगा और बीसीसीआई सूत्रों के अनुसार बोर्ड ने सत्र के शुरू में इसे मनाने का फैसला किया है। सूत्रों ने कहा कि अभी कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई है लेकिन सत्र के शुरू में इस उपलब्धि को यादगार बनाया जाएगा। अगले कुछ महीनों में इस पर अंतिम फैसला कर लिया जाएगा।

रणजी ट्राफी में पहला मैच मद्रास (अब तमिलनाडु) और मैसूर (अब कर्नाटक) के बीच चार नवंबर 1934 को खेला गया था। चेन्नई के चेपक में खेले गए इस मैच में मद्रास ने एक दिन में ही पारी से जीत दर्ज की थी।

मशहूर आलराउंडर एजी राम सिंह जिनके पुत्र कृपाल सिंह और मिल्खा सिंह भारत की तरफ से टेस्ट मैच खेले थे तथा सीपी जानस्टन ने मैसूर को 48 रन पर समेट दिया। इसके जवाब में मद्रास ने 130 रन बनाए। एमजी विजयसारथी जो बाद में टेस्ट अंपायर बन गए, ने छह विकेट लिए।

मैसूर हालांकि दूसरी पारी में 59 रन पर सिमट गया। एमजे गोपालन ने तीन और राम सिंह ने पांच विकेट लिए। इस तरह से मद्रास ने पारी और 23 रन से जीत दर्ज की और तीन दिवसीय मैच एक दिन में ही सिमट गया। बाद में बंबई (अब मुंबई) ने भारतीय क्रिकेट पर दबदबा बनाया और पहले सत्र में ही उत्तर भारत को फाइनल में 208 रन से हराकर खिताब जीता।  बंबई ने 266 और 300 रन बनाए जबकि अपनी विरोधी टीम को 219 और 139 रन पर ढेर कर दिया। एचजे विजिफदार ने 40 रन देकर आठ विकेट लिए थे।

पहले सत्र में कुल 16 टीमों ने भाग लिया था जिसमें मध्य भारत, उत्तर भारत, सेंट्रल प्रोविन्सेस एवं बेरार, यूनाईटेड प्रोविन्सेस, सिंध, पश्चिमी भारत, दक्षिणी पंजाब भी शामिल है।

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