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नीतीश ने बजट में हुए अन्याय की शिकायत की

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री डा.मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की एक बार फिर मांग की है और बजट में प्रदेश के साथ हुए भेदभाव की तरफ उनका ध्यान दिलाया है।
 
कुमार ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में इस बात पर गहरी चिंता जताई कि श्रीलंका के तमिलों के पुनर्वास के लिए बजट में 500 करोड़, पश्चिम बंगाल में आईला तूफान के लिए 1000 करोड़ तथा राष्ट्रकुल खेलों के लिए 16300 करोड़ रुपए आवंटित किए गए जबकि बिहार को कोशी बाढ़ से प्रभावितों के पुनर्वास के लिए 14800 करोड़ रुपए की मांग पर ध्यान ही नहीं दिया गया। जबकि प्रधानमंत्री ने खुद ही इस बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया था।
 
मुख्यमंत्री ने पत्र में यह भी लिखा है कि बजट में पश्चिम बंगाल तथा तमिलनाडु के लिए हैंडलूम कलन्टर्स की घोषणा की गई। राजस्थान में भी एक पावरलूम की घोषणा की गई पर बिहार के लिए कुछ भी घोषणा नहीं की गई, जबकि भागलपुर में हैंडलूम के अल्पसंख्यक कारीगरों की पर्याप्त आबादी है। इतना ही नहीं कृषि और बिजली के क्षेत्र में भी बिहार की मांगों पर भी ध्यान नहीं दिया गया।
 
पत्र में कहा गया है कि बजट में बिहार को कृषि क्षेत्र में कोई समर्थन नहीं दिया गया। इसी तरह राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत तीन फेनवाली बिजली की मांग की गई पर बजट में इसका कोई जिक्र नहीं हैं।
 
कुमार ने यह भी कहा है कि जब तक बिहार में गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों की संख्या ठीक से निर्धारित नहीं हो जाती खाद्य सुरक्षा का फायदा राज्य के लोगों को नहीं मिल पाएगा। बिहार में डेढ़ करोड़ लोग गरीबी की रेखा से नीचे है पर भारत सरकार 65 लाख ही गिनती करती है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि फिंट्र्ज बेनीफिट टैक्स और कामोडिटीज ट्रांसजेक्शन टैक्स के हटने से बिहार को 4616 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। इस संबंध में राज्य सरकारों से कोई सलाह मशविरा भी नहीं किया गया।

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