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नरेगा : काम का टोटा, ग्रामीणों का पलायन

एकओर जहां बारिश के लिए किसान तरस रहे हैं वहीं कई गांवों में नरेगा का मखौल उड़ रहा है। मजदूरों का हाल खराब है। नरेगा को कोसते हुए एक मजदूर ने कहा कि एक ओरी सरकार हमहन के मजूरी देवे क नारा देत हव ओहीं काम क पतै नहीं हव।

कहीं नरेगा के कार्य हैं लेकिन निर्धारित संख्या में श्रमिकों की आवश्यकता के मद्देनजर सभी जॉबकार्डधारकों को काम नहीं मिल रहा है। सो, ऐसे लोग गांव से बाहर रोजी-रोटी कमाने निकल पड़े हैं। कई ऐसे किसान भी हैं जिन्होंने काम के अभाव में गांव छोड़कर मुंबई व नासिक जैसे शहरों की ओर रुख कर लिया है।

पिंडरा ब्लाक के बरजी गांव में कुछ दिन पहले तक नरेगा कार्य में 50 जॉबकार्डधारक लगाये गये थे। अब उनकी संख्या औसतन 90 तक पहुंच चुकी है। विक्रमपुर में करीब एक पखवारे से ग्राम पंचायत अधिकारी निलंबित होने व प्रशासन की उदासीनता से यहां नरेगा का कार्य बाधित है।

यहां के मजदूर निकट के नदोय, खासिलपुर तथा करखियांव की फैक्टिरयों में काम कर रहे हैं। इसी गांव के पांच बीघा खेत के मालिक शिवशंकर व कुछ अन्य किसान अन्य शहरो में चले गये हैं। अजईपुर के प्रधानपति राजकुमार मौर्य के अनुसार गांव में नरेगा का 104 जॉबकार्ड है लेकिन ब्लाक अफसरों की लापरवाही के कारण मजदूरों के पास काम नहीं है।

यहां के किसान गुलाब मौर्य ने मुंबई की राह थामी है। किसान सुशील कुमार शहर में मजदूरी कर रहे हैं। रिक्शा खींच रहे रामपुर के जॉब कार्डधारक विजयी बोले, नरेगा से आस जगल रहल लेकिन उहो हवा-हवाई बुझत हव।

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