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बारिश की बाट जोह रहे हजारों एकड़ खेत पड़े हैं सूखे

बारिश की बाट जोह रहे हजारों एकड़ खेत पड़े हैं सूखे

जनपद के शहरी इलाके से पिंडरा विकास खंड में रमईपट्टी गांव से प्रवेश करते ही दूर-दूर तक खेतों में उड़ती धूल बंजर होने का भ्रम पैदा करते हैं। पगडंडियों पर किसान आकाश की ओर देखते हुए इंद्रदेव से ढेर सारी आस लगाये बैठा है।

क्षेत्र में धान के कटोरे के तौर पर पहचाना जाने वाला हथिवार गांव किसान रामचंद्र पूछने के अंदाज में बोले, ईहां कब्बो धान होई कि नाहीं! अब ई त भगवानै बतइहें। आगे बढ़े तो तेज हवा के साथ उमड़-घुमड़कर गायब हो जाते बादलों को देख सरायतक्की के किसान अमरजीत ने कहा, भइया भगवान क ई लुका-छिपी त एक महिन्ना से चलत बा। जोहत हई कि सब ले ओनकर मेहरबानी होई।

धान की खेती करने वाले इन्हीं किसानों में शुमार मानापुर के रघुवर पटेल खेत की मेढ़ दुरुस्त करते हुए बोले, पानी क हाल देखके अबकी बेरी हम रहरी क खेती करे क सोचत हईं। धान की रोपाई के इंतजर में बूंद-बूंद पानी को तरस रहे ब्लाक के हजारों एकड़ खेतों से जुड़े सैकड़ों किसानों की यही पीड़ा है।

जहां थोड़ी बहुत रोपाई हुई भी है वहां पर्याप्त पानी के अभाव में खेतों में दरारें पड़ चुकी हैं। वजह, इलाके के तमाम तालाब, कुओं में पानी का टोटा है। शारदा सहायक नहर से जुड़े तमाम रजवाहे सूखे पड़े हैं। जहां थोड़ा बहुत पानी है वह भी जलस्तर कम होने के कारण खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा है। भूगर्भ जल का स्टेटा गिर जाने से निजी ट्यूबवेल तक ठप पड़ गये हैं।

किसानों में हाहाकार की यह स्थिति पिंडरा के अस्सी फीसदी धान बेल्ट में है। यहां के विक्रमपुर में नहर के पानी की आस लगाये रामजी को चिंता है कि यदि धान की रोपाई नहीं हुई तो घर में रखे अनाज से आखिर कबतक परिवार का पेट भरेगा। अजईपुर के राजकुमार मौर्य जैसे तमाम किसानों की मुश्किल यह है कि माइनर में जहां एक बूंद पानी के दर्शन नहीं हुए वहीं गांव का तालाब भी सूख चुका है।

खालिसपुर के एक बड़े हिस्से में खेती करने वाले रविनंदन चौबे का निजी ट्यूबवेल पानी का स्टेटा काफी नीचे चले जाने के कारण ठप पड़ गया है। तमाम खेतों में तो गेंहू की फसल कटने के बाद कोई कार्य हो ही नहीं सका है। बारिश न होने से सूखे की पड़ती दस्तक से किसानों की सांसें थमी हुई हैं। ब्लाक के धान बेल्ट में प्रमुख रूप से गजोखर, उदपुर, बढ़ौना, नदोय, देवजी, बरवां, हीरामनपुर, पतिराजपुर एवं दबेथुआ, मलहथ, बचौरा, बरजी, रामपुर, थाना, असबालपुर, पिंडराई व मानापुर आदि गांव हैं।

कुओं व तालाबों में भी पानी न होने से पारंपरिक ढंग से भी खेती संभव नहीं हो पा रही है। शारदा सहायक नहर से जुड़े इन क्षेत्रों के रजवाहों से खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। तमाम किसानों ने बेहन तैयार रखा है लेकिन माइनरों में बहुत कम मात्रा पानी है। वहीं हर फसली पर वसूली के किए लगान तैयार हो जाती है।

किसानों में इसी बात से पसीने छूट रहे हैं कि नहर का पानी प्रयोग करने संबंधी वसूली भी अक्टूबर-नवंबर तक शुरू होगी तो कहां से देंगे पैसा। अजईपुर गांव में सरकारी नलकूप का स्टार्टर बीते दो माह से नहीं लगाया गया है। कई अन्य नलकूप खराब पड़े हैं।

किसानों में यह चिंता भी है कि यदि फसल नहीं हुई तो पालतू पशुओं के लिए चारा कहां से लाएंगे। रामदेव यादव, मेल्हू यादव, सियाराम, रामसूरत, श्रीप्रकाश, मोहनलाल मौर्य, मटरू प्रसाद सिंह, सुभाष यादव जैसे सैकड़ों किसान त्रस्त हैं।

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  • Web Title:सूखे की दस्तक! किसानों में हाहाकार