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आतंकवाद से लड़ने के लिए गुट निरपेक्ष राष्ट्र प्रतिबद्ध

आतंकवाद से लड़ने के लिए गुट निरपेक्ष राष्ट्र प्रतिबद्ध

गुट निरपेक्ष आंदोलन (नैम) के सदस्य राष्ट्रों ने भारत की चिंता को ध्यान में रखते हुए आतंकवाद से लड़ने का संकल्प जताया और स्पष्ट किया कि आतंकवाद को धर्म, राष्ट्रीयता, नागरिकता या किसी जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

15वीं नैम शिखरवार्ता की घोषणा में आतंकवाद का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा। इसमें अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन की रूपरेखा को अंतिम रूप देने की बात की गई जिसका प्रस्ताव भारत ने संयुक्त राष्ट्र के समक्ष रखा था।

118 सदस्य राष्ट्रों वाले समूह ने आतंकवाद के सभी प्रकारों से लड़ने के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतरराष्ट्रीय कानून और संबंधित अंतरराष्ट्रीय समक्षौतों के अनुसार नैम की एकाग्रता मजबूत करने पर सहमति जतायी, चाहे इसे किसी ने भी और कहीं भी अंजाम दिया हो।

शिखरवार्ता की घोषणा में इस बात पर जोर दिया गया कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, नागरिकता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। इसके मुताबिक सभी किस्म के आतंकवाद के जवाब में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की संयुक्त संगठित प्रतिक्रिया सरीखे मुददों पर निर्गुट देशों के सदस्यों के नजरियों और एक्षानों को ध्यान में रखते हुए और प्रगति की जरूरत है।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुट निरपेक्ष आंदोलन के सदस्य राष्ट्रों से आहवान किया कि अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन पर सहमति का समय आ गया है। प्रधानमंत्री सिंह ने अपने भाषण में स्पष्ट किया कि आतंकवादियों को और इन्हें सहायता पहुंचाने वालों को न्याय के कठारे में लाया जाना चाहिए। हालांकि सिंह ने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया लेकिन उनके बयानों से यह स्पष्ट था कि उनका संकेत किस ओर है।

मनमोहन सिंह ने कहा कि आतंकी ढांचे को ध्वस्त किया जाना चाहिए और आतंकवादियों के लिए कोई सुरक्षित पनाह नहीं होनी चाहिए क्योंकि वे किसी धर्म, जाति का प्रतिनिधित्व नहीं करते।
  

घोषणापत्र में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, वित्तीय प्रणाली और वैश्विक आर्थिक संकट के मद्देनजर प्रकाश में आये दोषों पर ध्यान देने की संरचना में मूलभूत सुधार पर जोर देने के लिए निर्गुट देशों के सदस्य को चीन के साथ और 77 देशों के समूह के साथ खड़े होना चाहिए। इसके मुताबिक हम अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों सहित अंतरराष्ट्रीय निर्णय क्षमता और नियम रचना में विकासशील देशों की आवाज और सहभागिता को और बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

घोषणापत्र के अनुसार आर्थिक संकट के जवाब में उठाये गये सभी कदमों से यह सुनिश्चित होना चाहिए कि वे विकासशील देशों की कीमत पर नहीं लिये जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार के संबंध में घोषणा पत्र में त्वरित सुधार की मांग की गयी है। घोषणापत्र के अनुसार सुरक्षा परिषद के विस्तार और इसकी कार्यप्रणाली में मजबूती के जरिये इसका त्वरित सुधार आन्दोलन के देशों के लिए प्राथमिकता होनी चाहिए।

आन्दोलन के कुछ देशों पर लगाये गये प्रतिबंधों में घोषणापत्र ने उन्हें एकपक्षीय कहकर खारिज कर दिया जो कि अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्रों घोषणा पत्र के मकसदों तथा सिद्धांतों के भी विरोधाभासी है। घोषणा में मांग की गई कि आन्दोलन के सभी सदस्य देशों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए और इसकी एजेंसियों को दोहा दौर की वर्तमान वार्ता में निर्णायक तौर पर जरूरी लघु, मध्य और र्दीघकालिक कार्रवाई तय करनी चाहिये।

जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर घोषणापत्र में संकल्प व्यक्त किया गया है कि दिसंबर में होने वाले कोपेनहेगन सम्मेलन की तैयारी के लिए राजनीतिक प्रयास को गति दी जाए। व्यापक संरा उर्जा एजेंडे को शक्ल देने के लिहाज से घोषणापत्र में कहा गया है कि आन्दोलन के सदस्य राष्ट्र सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के मकसद  से विकासशील देशों को आधुनिक उर्जा प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण के लिए एक प्रभावी प्रणाली के निर्माण के लिए काम करेंगे।

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