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मनमोहन-गिलानी साझा बयान में आतंकवाद मुद्दा

मनमोहन-गिलानी साझा बयान में आतंकवाद मुद्दा

भारत और पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को समग्र वार्ता से नहीं जोडने पर गुरुवार को सहमत हुए, वहीं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष यूसुफ रजा गिलानी से यह वादा करवा लिया कि मुंबई हमलों के षडयंत्रकारियों को दंडित करने के लिए इस्लामाबाद वह सब कुछ करेगा, जो उसके अधिकार में है।

मनमोहन और गिलानी के बीच ढाई घंटे चली बातचीत के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य में कहा गया कि दोनों पक्ष आपसी विश्वास और भरोसे का माहौल निर्मित करने पर सहमत हुए हैं। दोनों पक्षों ने यह प्रण किया है कि उन सभी कारकों को दूर किया जाएगा जो दोनों पड़ोसी देशों को आपसी संबंध की व्यापक संभावनाओं को पूरी तरह साकार करने से रोकते हैं। मुंबई हमलों की पष्ठभूमि के चलते आतंकवाद पर केंद्रित रही इस बातचीत के दौरान दोनों पक्षों ने भविष्य के किसी भी आतंकवादी खतरे के बारे में वास्तविक, विश्वसनीय और कार्रवाई करने योग्य जानकारी का आदान-प्रदान करने का फैसला किया।

संयुक्त वक्तव्य के अनुसार, दोनों प्रधानमंत्री यह मानते हैं कि भविष्य में एकमात्र रास्ता बातचीत का है। आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को समग्र वार्ता प्रक्रिया से नहीं जोड़ा जाना चाहिए और इन दोनों मुद्दों को एक ही खांचे में नहीं रखा जाना चाहिए। दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए हैं कि दोनों देशों के समक्ष आतंकवाद एक मुख्य खतरा है। दोनों नेताओं ने आतंकवाद से लड़ने तथा इस दिशा में एक दूसरे के साथ सहयोग करने के प्रण की अभिपुष्टि की है।

मनमोहन ने रेखांकित किया कि भारत पाकिस्तान के साथ लंबित मुद्दों सहित सभी विषयों पर चर्चा करने को तैयार है। गिलानी ने बैठक को बड़ी प्रगति करार दिया। बातचीत के दौरान मनमोहन ने यह सुनिश्चित कराने पर जोर दिया कि मुंबई हमलों के षड्यंत्रकारियों को न्याय के कटारे में लाया जाए।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए गिलानी ने मनमोहन को आश्वस्त कराया कि पाकिस्तान इस संबंध में वह सब कुछ करेगा जो उसकेअधिकार में है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने मुंबई हमलों पर जांच के बारे में ताजा स्थिति संबंधी दस्तावेज मुहैया करा दिया है और इसके तहत अतिरिक्त जानकारी अथवा सबूत चाहे गए हैं।

महत्वपूर्ण रूप से, संयुक्त वक्तव्य में बलूचिस्तान में आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान की चिंताओं का भी उल्लेख किया गया। बलूच में आतंकवाद के लिए पाकिस्तान भारत को जिम्मेदार ठहराता है। संयुक्त वक्तव्य के अनुसार, प्रधानमंत्री गिलानी ने कहा कि पाकिस्तान के पास बलूचिस्तान और अन्य क्षेत्रों में खतरों के बारे में कुछ जानकारी है। सौहार्दपूर्ण और रचनात्मक मुलाकात के दौरान मनमोहन और गिलानी ने द्विपक्षीय संबंधों के विविध विषयों पर चर्चा की।

वक्तव्य के अनुसार, दोनों नेता इस पर राजी हुए हैं कि असल चुनौती विकास करने और गरीबी हटाने की है। दोनों नेता उन कारकों को हटाने के लिए वचनबद्ध हैं जो दोनों देशों के संबंधों को व्यापक संभावनाओं तक साकार करने से रोकते हैं।

मनमोहन और गिलानी इस पर भी सहमत हुए कि विदेश सचिवों को जरूरत के मुताबिक समय-समय पर बैठक करनी चाहिए और इसकी दोनों विदेश मंत्रियों को रिपोर्ट देनी चाहिए जो आगामी संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर मुलाकात करने वाले हैं। मनमोहन ने यह भी दोहराया कि भारत के हित स्थिर, लोकतांत्रिक और इस्लामी गणराज्य वाले पाकिस्तान में हैं।

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