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मुद्रास्फीति बढ़ी, अब भी शून्य से नीचे

मुद्रास्फीति बढ़ी, अब भी शून्य से नीचे

ईंधन उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के मद्देनजर मुद्रास्फीति में चार जुलाई को समाप्त सप्ताह के दौरान हल्की वृद्धि हुई और यह बढ़कर शून्य से 1.21 फीसदी नीचे आ गई। इससे पिछले सप्ताह यह शून्य से 1.55 फीसदी कम थी।

इस दौरान अनाज, दाल मसाले और फल एवं सब्जियों की कीमतें भी बढ़ीं। पिछले साल की समान अवधि में थोकमूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति 12.19 फीसदी थी। सरकार द्वारा एक जुलाई से ईंधन की कीमतों में की गई बढ़ोतरी के फैसले के बाद नाफ्था की कीमत 15 फीसदी, फर्नेस आयल 11 फीसदी, पेट्रोल 10 फीसदी, हाई स्पीड डीजल की कीमत सात फीसदी और लाईट स्पीड डीजल की कीमत चार फीसदी बढ़ी।

पेट्रोल और डीजल में क्रमश: चार रुपये और दो रुपये की बढ़ोतरी के बाद ईंधन उत्पाद मंहगे हो गए। नतीजतन इस सप्ताह के दौरान ईंधन, बिजली, लाईट और ल्यूब्रिकेंट सूचकांक में 3.1 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई। यह लगातार पांचवां सप्ताह है जबकि मुद्रास्फीति शून्य से नीचे है। हालांकि विश्लेषकों के मुताबिक हो सकता है कि 28 जुलाई को ऋण नीति की समीक्षा में आरबीआई बेंचमार्क नीतिगत दरों में कटौती नहीं करे या अनुपातों में कमी न करे।

आरबीआई के पूर्व गवर्नर एसएस तारापुर ने कहा कि आरबीआई को जुलाई की मौद्रिक समीक्षा में रेपो दरों में कटौती नहीं करनी चाहिए और नकद आरक्षी अनुपात में कमी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि फिलहाल मौद्रिक प्राधिकारों के सामाने राजकोषीय घाटे से निपटने की चुनौती है। इस सप्ताह काफी 15 फीसदी मंहगी हुई जबकि अरहर तीन फीसदी, मक्का दो फीसदी और अचार एवं मसाले एक फीसदी मंहगे हुए।

इसके अलावा काफी पाउडर सात फीसदी और घी एवं चीनी में एक-एक फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। साल दर साल के आधार पर अनाज की कीमत 12 फीसदी, दाल 17.2 फीसदी और फल एवं सब्जियां 11 फीसद मंहगे हुए जबकि दूध पिछले साल के मुकाबले 4.8 फीसदी मंहगा हुआ और मसाले करीब 6.8 फीसदी मंहगे हुए। विनिर्मित उत्पादों में चीनी खांडसारी और गुड़ में 34.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई जबकि मछली 42.7 फीसदी मंहगी हुई।

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