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भारत की पहली परमाणु पनडुब्बी ‘अरिहंत’

भारत की पहली परमाणु पनडुब्बी ‘अरिहंत’

भारत की पहली परमाणु पनडुब्बी का इस महीने के आखिर में जलावतरण होने जा रहा है और इसे ‘आईएनएस अरिहंत’ नाम दिया गया है। अरिहंत यानी शत्रुओं का वध करने वाली यह परमाणु पनडुब्बी विशाखापत्तनम की शुष्क गोदी से समुद्र में उतरने जा रही है।

उच्च पदस्थ रक्षा सूत्रों ने कहा कि एडवांस्ड टेक्नोलॉजी वैसल नाम से चल रही परियोजना का यह अत्यंत महत्वपूर्ण चरण है। उस चरण में विशाखापत्तनम में शुष्क गोदी के विशालकाय द्वार खोल दिए जाएंगे और छह हजार टन वजनी यह परमाणु पनडुब्बी समुद्री परीक्षणों के दौर में प्रवेश कर लेगी।

करीब दो दशक से गोपनीयता के अभेद्य दुर्ग के भीतर भारत अपनी इस परमाणु पनडुब्बी का विकास कर रहा था, जो नौसेना प्रमुख एडमिरल सुरीश मेहता की मौजूदगी में सूरज की पहली किरण देखने के बाद समुद्र की अतल गहराईयों में समा जाएगी। समझा जाता है कि जलावतरण समारोह के दौरान प्रधानमंत्री की पत्नी गुरशरण कौर भी मौजूद होंगी।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के वैज्ञानिक इस परियोजना को टेक्नोलॉजी प्रदर्शित करने वाली परियोजना कहते रहे हैं, लेकिन अब सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि यह अपने आप में पूर्ण प्लेटफार्म होगी और इस पर इंटर कोन्टिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल भी तैनात की जा सकेगी।

सूत्रों ने कहा कि आईएनएस अरिहंत भारतीय रक्षा वैज्ञानिकों की आजाद भारत की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शुमार होगी। परमाणु ईंधन से चलने वाली यह पनडुब्बी असीमित समय तक जल के भीतर रह सकेगी। परंपरागत पनडुब्बियों को अपनी बैटरियां चार्ज करने के लिए हवा लेने की खातिर सतह पर आना पड़ता है।

इसी साल भारत को रुस अकुला दो क्लास की नेरपा नाम की परमाणु पनडुब्बी दस साल की लीज पर मिलने जा रही है। इसे आईएनएस चक्र नाम से भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा।

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