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वो कागज की कश्ती, ये बारिश का पानी..

वो कागज की कश्ती, ये बारिश का पानी..

दोस्तों, जब कारे-कारे मेघा काली घटा बन कर लहराते हैं और बारिश की लडि़यां अपने खास अंदाज से हमसे बात करती हैं, तब कुछ खास तो होना ही चाहिए, ताकि लगे कि तुम भी झूम कर बरखा रानी का स्वागत कर रहे हो कुछ ऐसे..

रेन-बो का नजारा नहीं है कम


दरअसल रेन-बो वर्षा की बूंदों पर पड़ने वाली सूर्य की किरणों के डिस्पर्सन यानी फैलाव के कारण बनता है। जब सूर्य की किरणें वर्षा की बूंदों में प्रवेश करती हैं, तो वे रिफ्लेक्ट यानी तिरछी हो जाती हैं और फिर बूंदों से निकलते समय लाइट रिफ्रेक्ट यानी कि प्रतिबिंब बनाती हैं। कहने का मतलब यह है कि सूर्य की किरणें कई कोणों पर रिफ्लेक्ट करती हैं, जिसकी वजह से रेन-बो बनते हैं।  यह बरसात के मौसम के अलावा, वाटरफॉल तथा समुद्र में बनने वाली बड़ी लहरों के पास भी दिखाई पड़ता है। सच तो यही है कि खुले स्थानों में, जहां-जहां नमी बनती है, वहां-वहां रेन-बो दिखाई पड़ने की संभावना रहती है।

बारिश में नाव

दोस्तों, क्या तुमने कभी नाव चलाई है। हम बड़ी नदी में चलने वाली नाव की बात नहीं कर रहे। हम बात कर रहे हैं, तुम्हारी खुद की बनाई कागज की नाव की। दरअसल अब तुम बच्चे नाव चलाकर मनोरंजन करते दिखाई नहीं देते। मगर आज भी दूरदराज के गांवों या छोटे शहरों में बच्चे बरसात के इस मौसम में मजे से नाव चलाते हैं। तुम भी दूर तक तैरती  हुई नाव देख सकते हो। झमाझम बारिश के बाद तुम्हारी कॉलोनी में जगह-जगह पानी इकट्ठा हो जाता है। उस पर नाव छोड़ना, मस्ती ही मस्ती है। अगर तुम्हें फुल मस्ती चाहिए तो सभी दोस्त एक साथ अपनी कश्ती पानी  में उतारो। फिर देखना कैसे छोटी-बड़ी कश्ती धीरे-धीरे पानी में तैरती हैं। इन्हें देख कर तुम खूब एन्जॉय करोगे। अगर तुम्हें नाव बनानी नहीं आती तो तुमे बड़े भाई या पेरेंट्स से सीखो। इन्हें नाव बनानी जरूर आती होगी। उन से पूछना कि जब वे इस मौसम में खुद की बनाई नाव चलाते थे तो उन्हें कैसा लगता था।

डॉगी का साथ और रिमझिम बरसात

तुम अक्सर शाम के वक्त अपने डॉगी को पार्क में घुमाने ले जाते हो। उसके साथ खेलने में तुम्हें मजा भी बहुत आता है। तो क्यों न इस मौसम में बारिश की रिमझिम फुहारों का मजा अपने डॉगी के संग लिया जाए। यकीन मानो उसे भी बहुत मजा आएगा। ध्यान रहे कि  भीगने में तुम इतने मत खो जाना, जिस से तुम्हें समय का ख्याल ही न रहे। कहने का मतलब यह है कि 10-15 मिनट के बाद खुद डॉगी के साथ वापस घर आ जाना। हां अगर तुम्हारा डॉगी कुछ दिनों से बीमार चल रहा है तो उसे बारिश में लेकर मत जाना।

गर्मागर्म पकौड़े हो जाएं

सोचो आज छुट्टी का दिन है। आज भैया दीदी, मम्मा पापा सभी घर में हैं। बाहर झमाझम बारिश हो रही है। खिड़की से तुम अपने गमले के पत्तों पर पड़ रही बूंदों को निहार कर खुश भी हो रहे हो। शाम का वक्त है। हर रोज की तरह चाय बनने का समय है। मम्मा से कहो मम्मा आज चाय के साथ गर्मा-गर्म पकौड़े बना दो। हां तुम इतना जरूर कर सकते हो कि मम्मा की किचन में कुछ हैल्प कर दो। और बनते ही सभी को उनकी जगह पर सर्व भी कर देना। तुम खुद महसूस कर सकोगे कि बारिश में चाय और पकौड़े का आनंद अलग ही होता है। तुम चाहो तो अपने कुछ दोस्तों को भी बुला सकते हो।

गीत तो गुनगुनाओ कोई

संगीत तो स्कूल में भी तुम्हारा मनपसंद विषय है। तो देर किस बात कि अपना गिटार उठाओ और शुरू हो जाओ। इस्ट्रमेंट तुम्हारी पसंद का कोई भी हो सकता है।  छई, छप्पा छई, छप्पाक छई.. जैसा कोई भी  गीत तुम गुनगुनओगे तो ऐसा लगेगा मानो बारिश की बूंदें भी तुम्हारा साथ दे रही हैं। जरूरी नहीं तुम्हें बारिश के गीत गा कर मस्ती करनी है। अपनी पसंद को कोई भी गाना जिसे गाकर व दूसरों को सुन कर मजा आए, तुम गुनगुना-गा सकते हो।

बारिश को उतारो कैनवस पर

तुम में ऐसे बहुत से होनहार होंगे, जो देख कर कैनवस पर हूबूहू वैसा ही उतार देते हैं। बस तो इस मस्त मौसम में क्यों न कुछ ऐसा ही किया जाए। घर की बालकनी या खिड़की से बाहर तांक-झांक करो। तुम देखोगे कि बाहर एक से एक मजेदार सीन नजर आएंगे। सब्जी वाला भैया रेहड़ी दौड़ा कर सब्जियां बचा रहा होगा तो कुछ लोग एक ही छतरी से बरिश की बूंदों से बचने की कोशिश कर रहे होंगे। तो वहीं पेड़ों पर रिमझिम बारिश से मस्त प्राकृतिक दृश्य बना रहा होगा। बस उस दृश्य को कैनवस पर कैद कर लो।

मस्ती कुछ ऐसे भी..

हम जानते हैं कि तुम्हें  बारिश में भीगने में बहुत मजा आता है, लेकिन मम्मा मना करती हैं। आठवीं में पढ़ने वाली श्वेता कहती हैं,‘मैं तो बारिश का नाम सुनते ही झूमने लगती हूं।

आट्रिफिशयल शावर में वो मजा कहां, जो बारिश में भीगने में आता है। हमें तो स्कूल खुलने से बारिश का इंतजार शुरू कर दिया था।’ वहीं स्वभाव से कुछ शरारती अकिंत क्या कहता है, तुम्हीं पढ़ने ‘मैं स्कूल पैदल ही जाता हूं, क्योंकि मेरा स्कूल नजदीक ही है। इन दिनों मैं चाहता हूं कि बारिश उसी समय हो, जब स्कूल की छुट्टी हो, ताकि जम कर भीगा जाए। और रास्ते में छोटे पानी भरे हर गड्ढे में छप्पाक से पैर जरूर मारता हूं।’  तो हो जाओ तैयार तुम भी। 

 

 

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