अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

दो टूक

हिंदी को लेकर बुधवार को दो तरह के स्वर राजधानी में सुनाई दिए। एक स्वर लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान गूंज जब मुलायम सिंह यादव के टोकने पर कई दक्षिण भारतीय सांसदों ने हिंदी में सवाल-जवाब का सिलसिला शुरू किया। दूसरा स्वर एक संवाददाता सम्मेलन में सुनाई दिया जहां तमिलनाडु में हिंदी को अनिवार्य बनाने की मांग की गई!

पहला सुर तर्कपूर्ण आग्रह का था और दूसरा कुतर्कपूर्ण दुराग्रह का! हिंदी को थोपने की मांग करने वाले भाषा की रक्षा में उसकी हत्या कर रहे हैं। हिंदी तो खुद ही देश भर में दिन दूनी, रात चौगुनी रफ्तार से बढ़ रही है! फिल्मों में, साहित्य में, मीडिया में- हर तरफ राजभाषा का जलवा है! फिर उसे अनिवार्य बनाने की बात क्यों? ख्वामखाह बैल को लाल कपड़ा दिखाने की जिद क्यों?

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:दो टूक