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छोड़ो चिंता-तनाव टल जाएगा बांझपन का खतरा

शादी के पांच साल हो गए और कोई बच्चा नहीं। युगल परेशान। लड़के के मां-बाप पोते-पोती का मुंह देखने को तरस रहे हैं..तो दंपती को मानसिक-सामाजिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में जांच कराते हैं तो सब नॉर्मल निकलता है। अब क्या करें? हमने यही सवाल चिकित्सकों-मनोवैज्ञानिकों के सामने रखा तो उन्होंने जानते हैं क्या जवाब दिया? कुछ करने की नहीं बल्कि चिन्ता-तनाव से मुक्त होने की जरूरत है। बिना स्ट्रेस लिए मजे से जिएं-औलाद की किलकारी जल्द ही सुनाई देगी।

लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अमिता सक्सेना एक पेशेंट का किस्सा बताती हैं। मल्टीनेशनल कम्पनी में कार्यरत 33 वर्षीय सपना जब मुझ से मिली, तब वह पिछले दो साल से गर्भधारण करने के लिए प्रयासरत थीं। फर्टिलिटी टेस्ट में स्त्री-पुरुष दोनों में ऐसी कोई शारीरिक कमी नहीं निकली कि वे मां-बाप न बन सकें। डॉक्टर ने उन्हें मनोवैज्ञानिक से मिलने की सलाह दी। मनोवैज्ञानिक ने देखा तो पाया कि न तो यह मामला हेल्थ का है, न ही मेंटल हेल्थ का। यह तो साधा सादा लाइफ स्टाइल से जुड़ा मामला है, जो उनके मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है। मनोवैज्ञानिक की सलाह मानते हुए दंपती ने रोजना सुबह 20 मिनट मार्निग वॉक, हल्के व्यायाम करना और ध्यान लगाना शुरू किया। इधर उन्होंने लाइफ स्टाइल बदलने के लिए माइंड बाडी प्रोग्राम ज्वाइन कर लिया। कुछ हफ्ते बाद ही सपना गर्भवती हो गई और अब वह पांच महीने की बेटी की मां है।

तनाव से महिलाओं के दिमाग, पिट्यूटरी और ओवेरी के बीच कम्युनिकेशन गड़बड़ा जता है। मनोवज्ञानिक कहते हैं कि तनाव के दौरान शरीर में कई तरह के न्यूरोकेमिकल परिवर्तन होते हैं। इसके अतिरिक्त गर्भधारण की प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण केमिकल मैसेंजर की स्थिति भी भावनाओं में परिवर्तन के साथ बदल जाती है।

दूसरी तरफ 36 वर्षीय नेहा ने शादी के दस साल बाद बच्चा गोद लिया। बच्चा गोद लेने के एक साल बाद ही वह गर्भवती हो गई। दरअसल शादी के बाद बच्चा न होने को लेकर हमेशा चिंतित रहती थी। बच्चा गोद लेते ही उनका सारा ध्यान बच्चे पर लग गया। जैसे ही चिंता कम हुई तो वह गर्भवती हो गई।

आज भी गर्भधारण को लेकर कई तरह की गलत धारणाएं हैं। क्या आप जानते हैं कि काम के बढ़ते प्रेशर के कारण युवा जोड़ों  में इन्फर्टिलिटी बढ़ी है। खासकर प्रेशर वाले जॉब्स जैसे साफ्टवेयर, मार्केटिंग, पत्रकारिता आदि में यह खतरा बहुत बढ़ गया है।

महिला और पुरुष बराबर
कोई भी दंपती, जिसके विवाह को एक साल या उससे ज्यादा हो गया है और गर्भधारण नहीं कर पाती तो इसका मतलब इन्फर्टिलिटी है। ऐसे में डाक्टर से सम्पर्क करें। गौरतलब है कि सामान्य जनसंख्या में 400 लोगों में से लगभग 40-45 प्रतिशत समस्या महिलाओं व इतनी ही कमी पुरुषों में पाई जती है। बाकी के बचे प्रतिशत को अनएक्सप्लेंड कारणों में डाला जाता है। ऐसा भी होता है कि स्त्री-पुरुष दोनों में कमी नहीं है, फिर भी इन्फर्टिलिटी है।

इन्फर्टिलिटी और तनाव
एजुकेटेड सोसाइटी और महानगरों में इस प्रकार के केस ज्यादा देखने को मिलते हैं क्योंकि यहां आपाधापी और वर्क प्रेशर रहता है। इसके अलावा पारिवारिक एकाकीपन भी अक्सर जोड़ों में अवसाद व बेचैनी पैदा करता है। आजकल लड़के-लड़कियां देर से शादी करते हैं। शादी करने के तुरंत बाद वह बच्च नहीं चाहते। इस वजह से शुरुआत में वह कई तरह की सावधानियां बरतते हैं। और फिर जब महिला जल्दी गर्भधारण नहीं कर पातीं तो चिंताग्रस्त हो जाती हैं। निरंतर दबाव में रहने के कारण वह दिन-रात बेचैन रहती हैं।

उन्हें खुद नहीं समझ आता कि पति-पत्नी दोनों स्वस्थ हैं फिर भी गर्भधारण क्यों नहीं कर पा रही। उन्हें तमाम तरह के तनाव हो जाते हैं। वे निरंतर चिंता, डिप्रेशन फस्ट्रेशन में घुलने लगती है जिसका असर उनकी सेहत पर पड़ता है। हाल में हुए एक सर्वे के अनुसार जो महिलाएं ज्यादा तनाव में रहती हैं उनमें से 40 प्रतिशत महिलाओं में बांझपन की शिकायत होती है। हालांकि अभी तक इस बात का ठोस प्रमाण नहीं है कि तनाव के कारण ही बांझपन है। फिर भी मुद्दे को लेकर कई मनोचिकित्सक व मनोवैज्ञानिकों ने अपने-अपने तर्क दिए हैं कि जो महिलाएं तनाव और डिप्रेशन में रहती हैं उनमें यह समस्या दोगुनी हो जाती है।

तनाव का शरीर पर प्रभाव
शारीरिक क्रिया हो, लेकिन इसके तार मन से जुड़े होते हैं। निरंतर चिंता में रहने के कारण महिला व पुरुष दोनों के हारमोन्स असंतुलित होने लगते हैं। हमारे शरीर में केमिकल ट्रांसमीटर होता है, सेरोटोनियर और डोपामीन नामक के हार्मोन मिलकर आपके दिमाग को संतुलित रखते हैं। शारीरिक स्तर पर महिलाओं में भारी अनियमित रक्तस्राव, मासिक धर्म के दौरान थकान, पेट में मरोड़, पेडू में दर्द या कब्ज की शिकायत हो जाती है। हारमोन्स का असर आपके दिमाग से होता है। जब आप लगातार किसी दबाव में रहते हैं तो हार्मोन्स असंतुलित हो जाते हैं।

क्या है इलाज
गर्भधारण करने से कुछ महीने पूर्व आप अपने को इसके लिए मानसिक रूप से तैयार करें। तुर्की शोधकर्ता के मुताबिक जब किसी महिला को भावनात्मक रूप से सपोर्ट मिलता है तो वह जल्दी गर्भधारण करती है। उच्च तकनीक तब मुफीद साबित होती है जब मरीज को भावनात्मक सपोर्ट मिलता है।

डाइट मैनेजमेंट
गुणकारी व स्वास्थ्यवर्धक खाना खाने से हमारी सेक्स लाइफ भी प्रभावित होती है। कई खाद्य पदार्थ जैसे दूध, चॉकलेट, मांसाहारी भोजन हैं, जो सेक्स पॉवर में वृद्धि लाते हैं।

साइकोथेरेपी

संज्ञानात्मक और व्यवहारात्मक थेरेपी
यह आपके नकारात्मक विचारों को दूर करने में सहायक होती है। इसके अलावा जीवन के प्रति आपका सकारात्मक रवया बनता है।

समूह सहयोग
व्यक्ति को मनोवैज्ञानिक बल दें। रोगी का ध्यान दूसरी तरफ लगाने की कोशिश करें।

सकारात्मक नजरिया
जीवन के प्रति आपका नजरिया सकारात्मक होना चाहिए, नकारात्मक व नैराश्यपूर्ण बातें, मानसिक परेशानियों का कारण बनती है। रचनात्मक गतिविधियों में अपनी सक्रियता बढ़ाकर इससे बचा ज सकता है। अनुसंधान से साबित हो चुका है कि सेक्स से संतुष्ट दंपतियों के बीच तालमेल बेहतर होता है और दांपत्य जीवन भी तनाव से मुक्त। आप भी सेक्स का भरपूर मजा लें।

संगीत
सुमधुर संगीत आपके तनाव को दूर करने में मददगार साबित हो सकता है। भजन, क्सासिकल संगीत का आनंद लें।

यांत्रिक क्रियाएं
यांत्रिक क्रियाएं जैसे ध्यान, आसन और प्राणायाम आदि भी तनाव दूर करने में कारगर साबित हुए हैं। अध्यात्म किसी के लिए भले ही व्यक्तिगत आस्था का विषय हो लेकिन तनावग्रस्त व्यक्ति के लिए इसकी अलग अहमियत है।
अध्यात्म एक ओर जहां प्रेम, खुशी, शांति, संतोष जसे सकारात्मक गुणों को बल प्रदान करता है वहीं ईर्ष्या, क्लेश, क्रोध जैसे नकारात्मक पहलुओं को खत्म करता है।

रिलेक्स
स्वस्थ तकनीकी योग, ध्यान आपके कॉफी, एल्कोहल की निर्भरता को कम कर देते हैं।

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