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दाद-खुजली-2

दाद की पहचान : दाद बदन पर लाल या सफेद गोल चकत्ते के रूप में प्रकट होती है। शुरू में यह चकत्ता छोटा होता है। बाद में यह चारों ओर बढ़ता जाता है। कुछ समय बाद चकत्ते के बीच का क्षेत्र अपना खोया रंग वापस पा लेता है। अब एक गोल घेरा-सा दिखने लगता है। इसमें खूब खुजली होती है। सर की दाद बाल की जड़ में होती है। इससे बाल ढीला हो जाता है और गिर जाता है। सर में खुजली होती है, दाने उठ आते हैं और कभी-कभी सूजन भी हो जाती है। मवाद पैदा हो सकती है। पैर की अंगुलियों की दाद में अंगुलियों के बीच की जगह गली हुई नजर आती है। त्वचा कट जाती है और दर्द करती है। खूब खुजली होती है।

बचाव : जुलाई-अगस्त के महीनों में उमस बढ़ने से बगल, काछ और जांघ के क्षेत्र की त्वचा पसीने में भीगी रहती है। व्यक्तिगत साफ-सफाई पर ध्यान देने से इस मौसम में भी जिस्म को फफूंद के प्रकोप से बचाया जा सकता है। रोज सुबह-शाम साबुन से स्नान करने से त्वचा साफ-सुथरी रहती है। स्नान के बाद बदन की नमी तौलिये से भली-भांति मिटाने के बाद ही वस्त्र धारण करना जरूरी है। बगल, काछ और जाँघों में टैलकम पाउडर बुरक लेने से भी लाभ पहुंचता है और त्वचा रगड़ खाने से बची रहती है। इसी प्रकार नायलॉन की बजाय सूती अंतर्वस्त्र जैसे जांघिया, बनियान और जुराबें पहनना भी बेहतर है। कपड़ों का चुनाव व डिजाइन जलवायु के अनुकूल होना जरूरी है। 

रिंगवर्म का इलाज : मुनासिब दवा करने से दाद जल्द नियंत्रण में आ जाता है। इसका इलाज लंबा है, पर मुश्किल नहीं। हां, दवा बीच में छोड़ने से हठी दाद फिर से लाल हो उठती है। इसमें कई दवाएं प्रभावी हैं। क्लोट्राइमाजोल, टोलनेफ्टेट, माइकानजोल और कीटोकोनाजोल दवाओं की मरहम और घोल सुबह-शाम लगाने से दाद में जल्द आराम आ जाता है। डाक्टर की सलाह से फफूंद-रोधी दवा लेने से रोग चंद हफ्तों में ठीक हो जाता है

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