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आतंकवादियों को पनाहगाह मुहैया न कराऐंः मनमोहन

आतंकवादियों को पनाहगाह मुहैया न कराऐंः मनमोहन

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आतंकवादी ढ़ांचे को नेस्तनाबूद करने के पक्ष में बुधवार को गुटनिर्पेक्ष बैठक में पुरजोर तरीके से आवाज उठायी और सदस्य देशों से कहा कि वे आतंकवादियों को पनाहगाह मुहैया न करायें।

इस तरह मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी के साथ बैठक से पहले पड़ोसी देश को एक कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने 118 सदस्य देशों वाले गुट निरपेक्ष आंदोलन के दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के उदाटन सत्र में संबोधित करते हुए कहा, हाल ही के वर्षों में आतंकवादी संगठन काफी अत्याधुनिक, अधिक संगठित और ज्यादा दुस्साहसी हो गये हैं। आतंकवादियों, उनकी मदद करने वालों तथा उन्हें उकसाने वालों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिये।

बहरहाल, मनमोहन ने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया पर उनके भाषण से किसी को भी यह संदेह नहीं था कि उनका इशारा किस ओर है। मनमोहन, गिलानी के साथ गुरुवार को मुलाकात करेंगे ताकि उनसे यह स्पष्ट प्रतिबद्धता ले सकें कि पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को रोकेगा और मुंबई हमलों के आरोपियों के खिलाफ मुकदमों की गति तेज करेगा।

मनमोहन ने कहा कि आतंकवाद के ढ़ांचे को नेस्तनाबूद किया जाना चाहिये और आतंकवादियों के लिये कोई पनाहगाह भी नहीं होने चाहिये क्योंकि वे किसी उददेश्य, समूह या धर्म का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। यह ऐसा समय है जब हमें अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद की रोकथाम के लिये एक व्यापक संधि पर सहमत होना होगा।

शिखर सम्मेलन में संबोधित करते हुए गिलानी ने कहा कि भारत के साथ पाकिस्तान के रिश्तों में हाल ही में बढ़ोत्तरी हुई है और उनके देश को उम्मीद है कि रिश्तों में गति बरकरार रहेगी और हम व्यापक संवाद की ओर बढ़ते रहेंगे।

पाकिस्तान मुंबई हमलों के बाद से थमी वार्ता प्रक्रिया की बहाली के लिये जोर दे रहा है। गिलानी ने इस मौके का इस्तेमाल जम्मू कश्मीर का मुद्दा उठाने के लिए किया।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान मानता है कि दक्षिण एशिया में टिकाउ शांति हासिल की जा सकती है बशर्ते इसे कश्मीर सहित सभी लंबित मुद्दों के निपटारे के जरिए मदद मिले।

गिलानी ने कहा कि क्षेत्र के डेढ़ अरब लोगों को शांति से काफी ज्यादा फायदा मिलेगा। मनमोहन के भाषण में आतंकवाद का मुद्दा प्रमुख तौर पर छाया रहा। मनमोहन ने कहा कि चरमपंथ, असहिष्णुता और आतंकवाद हमारे विरोधी तत्व हैं क्योंकि वे हमारे आंदोलन और हमें नष्ट करना चाहते हैं।

मिस्र को मिली नयी अध्यक्षता के तहत हो रहे इस शिखर सम्मेलन में मनमोहन ने आगाह किया कि अगर वश्विक आर्थिक संकट से निपटने के लिये तुरंत सुधारात्मक उपाय नहीं किये गये तो मंदी और बेरोजगारी का दौर लंबे समय तक बना रह सकता है।

उन्होंने कहा कि अगर संकट के बाद की स्थिति से सावधानीपूर्वक नहीं निपटा गया और अगर नकदी की बहुतायात के चलते सट्टेबाजी की गतिविधियों को बढ़ावा मिला तो हो सकता है कि हमें र्दीघकालिक मंदी और बेरोजगारी देखने को मिले।

प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित देशों के बाजारों में संरक्षणवाद ने वश्विक मंदी को मजबूती दी है और इससे विकासशील देशों के निर्यात तथा कर्ज और पूंजी के प्रवाह में अवरोध पैदा हो गया है। मनमोहन ने संकट जारी रहने की स्थिति में उसके नतीजतन पड़ने वाले संभावित प्रभावों के बारे में भी बात की।

उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण रूप से विकासशील देशों में मौजूदा मंदी जारी रहने से हमारे अधिक लोग गरीबी में धकेले जाऐंगे और पोषण, स्वास्थ्य तथा शिक्षा का स्तर कम होगा। बड़ी कीमत चुका कर तथा बलिदान देकर हासिल की गयी प्रगति खो जायेगी। सहस्राब्दी विकास लक्ष्य एक भ्रम बन जायेगा।

मनमोहन ने कहा कि गुट निरपेक्ष आंदोलन की यह सुनिश्चित कराने में बड़ी साझेदारी है कि वश्विक अर्थव्यवस्था को दोबारा सक्रिय करने की योजनाओं में विकासशील देशों की चिंताओं को भी शामिल किया जाये। इन चिंताओं में खाद्य तथा उर्जा सुरक्षा, पर्यावरण और वश्विक व्यवस्था वाले संस्थानों में सुधार की बात शामिल है।

गुट निरपेक्ष आंदोलन की प्रासंगिकता के बारे में उठते सवालों के बीच प्रधानमंत्री ने कहा कि गुट निरपेक्षता एक विचार है जो व्यक्त होता लेकिन कभी फीका नहीं पड़ता। हमें इसे आगे ले जाना होगा और इसे वर्तमान की चुनौतियों से निपटने के लिये विकसित करना होगा।

विकसित विश्व की जीवनशैली और औद्योगिक गतिविधियों के कारण दो शताब्दियों से अधिक समय से हो रहे ग्रीन हाउस गैसों के उत्सजर्न पर चिंता जताते हुए मनमोहन ने जोर दिया कि जलवायु परिवर्तन की समस्या के किसी भी न्यायसंगत समाधान में इस ऐतिहासिक जिम्मेदारी की पहचान होनी चाहिये।

मनमोहन ने कहा कि विकासशील देश जलवायु परिवर्तन से बदतर तरीके से प्रभावित हैं। उनकी यह सुनिश्चित कराने में बड़ी भागीदारी है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने की वश्विक कोशिशें सफल रहें।

उन्होंने कहा कि हम पर्यावरण संरक्षण के लिये हमारी जिम्मेदारियां जानते हैं। हम इस संबंध में पहले से ही उल्लेखनीय योगदान कर रहे हैं लेकिन जलवायु परिवर्तन की दिशा में उठने वाले कदमों से विकासशील देशों में गरीबी की स्थिति कायम नहीं रहना चाहिये।

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