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अनाथ बच्चों के लिए बनेंगे ओपन आवास

मां-बाप की मौत के बाद फुटपाथ पर जिंदगी गुजरने वाले बच्चों को अब छत भी नसीब होगी और खाने-पहने का इंतजाम भी। शासन बेसहारा और लावारिस बच्चों के लिए शहर ही नहीं, रूरल इलाकों में भी ओपन आवास बनवाने जा रहा है, जहां सरकारी खर्च पर न केवल उनका पालन-पोषण होगा, वल्कि पढ़ाई के साथ दस्तकारी के गुर भी सिखाए जाएंगे।


अफसरों के मुताबिक, सरकार ने इस योजना को समेकित बाल संरक्षण स्कीम नाम दिया है। शासन स्तर पर इसकी प्लानिंग कर ली गई और इसे मूर्त रूप देने के लिए सभी जिलों से जरूरी प्रस्ताव मांगे गए हैं। जिला प्रोबेशन अधिकारी राजीव शर्मा ने बताया कि आईसीपीएस में जिले में बाल संरक्षण संस्था, पालन पोषण समिति, ब्लाक स्तरीय बाल संरक्षण समिति के साथ ग्राम स्तर पर भी ऐसी ही समिति बनाने की योजना है।


उन्होंने बताया कि इस स्कीम के तहत जोखिम में पड़े बच्चों और उनके परिवारों को जरूरी सुविधाएं दी जाएंगी। चाइल्ड लाइन आपात सेवा का विस्तार करते हुए उसे गांव तक ले जाया जाएगा। गृहहीन, फुटपाथ पर रहने वाले बच्चे और बाल भिखारियों की देखरेख और उनकी जरूरतें पूरी करने के लिए आईसीपीएस द्वारा खुले आवासों की स्थापना की जाएगी। विशेष रूप ये यह व्यवस्था शहरी क्षेत्र में दी जाएगी, जहां इस तरह के बच्चों की तादाद बहुत होती है। ओपन आवास में बच्चों के खेलने, संगीत, नृत्य, नाटक, योग-ध्यान, कम्यूटर आदि सिखाने का इंतजाम किया जाएगा। व्यवसायिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। स्कीम में परित्यक्त बच्चों को भी रखा जाएगा और उनके मामलों की समीक्षा कर फिर से घर पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।


प्राबेशन अधिकारी के मुताबिक, योजना के क्रियान्वयन के लिए जल्द ही जिला बाल संरक्षण समिति का गठन किया जएगा। इसमें अध्यक्ष जिला पंचायत अध्यक्ष, जिलाधिकारी सह अध्यक्ष और जिला प्रोबेशन अधिकारी को बाल संरक्षण अधिकारी के रूप में जिम्मेदारी दी जानी है।

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