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चाल, चरित्र, चेहरा

‘चाल, चरित्र और चेहरा’ वाला मुहावरा माकपा का नहीं, भाजपा का है। माकपा वाले ऐसा नहीं कहते, लेकिन वे जो कुछ कहते हैं उसका अर्थ भी इस मुहावरे जसा ही होता है। कांग्रेसी इस बहस से काफी पहले, शायद पचास-साठ साल पहले ही उबर गए थे इसलिए उनके संदर्भ में ऐसी कोई बहस निर्थक है। भाजपा और माकपा का तब जन्म ही नहीं हुआ था। हिंदुत्व उन दिनों आरएसएस और हिंदू महासभा के जिम्मे था जो इस बात पर पछता रहे थे कि हाय, भारत इतनी जल्दी क्यों आजाद हो गया, अगर सौ दो सौ साल अंग्रेज और रुक जाते तो शायद हम इतने शक्तिशाली हो जाते कि इसे हिंदू राष्ट्र के रूप में हमें सौंपा जता। माकपा तब अविभाजित भाकपा के रूप में थी और तब उसमें यह बहस चल रही थी कि भारत को मिली आजादी सच्ची है या झूठी। जब वे यह फैसला नहीं कर पाए तो सोवियत संघ गए और तब स्टालिन ने उन्हें डांटते हुए फैसला सुनाया कि वे भारत की आजादी को सच्ची ही समझे और उसे फिर से आजाद करवाने का विचार छोड़ दें। कांग्रेस तब भी दुनियादार पार्टी थी और उसने पाया कि आजादी मिल गई है, अब त्याग, बलिदान इत्यादि की जरूरत नहीं। राज चलाने की जरूरत है और इसमें नैतिकता जैसी चीजें कतई फायदेमंद नहीं होतीं।


फिलहाल भाजपा और माकपा दोनों का मानना है कि वे अलग हैं, उनकी चाल अलग है, चरित्र अलग है, चेहरा अलग है। वे कांग्रेस की तरह नहीं हैं वे एक दूसरे किस्म की राजनैतिक संस्कृति के अंग हैं, लेकिन भाजपा और माकपा को यह जानने में काफी वक्त लग गया कि वे जैसे सोचते हैं वैसे हैं नहीं। यह वैसा ही है जैसे किसी को यह जानने में काफी समय लग जाए कि वह तो काफी समय से चरित्रहीन चल रहा है। चरित्रहीन होने का एक विशेष लक्षण यह भी होता है कि चरित्रहीनता से निकलने की इच्छा नहीं होती। जब इन दोनों को पता चला कि वे चरित्रहीन हो चुके हैं और इस कदर हो चुके हैं कि खोया हुआ चरित्र पाने की कोई उम्मीद नहीं है, तब उन्होंने दूसरा रास्ता निकाला।

इस रास्ते का आधार द्वंद्वात्मक भौतिकवाद है, जिसे माकपा मानती है और भाजपा साफ तौर पर नहीं मानती क्योंकि माकपा इसे मानती है। इसके अनुसार चूंकि हम चालहीन, चरित्रहीन और चेहराहीन नहीं हैं, इसलिए हम जो कुछ कर रहे हैं वह चरित्रहीनता हो ही नहीं सकती। चरित्रहीनता वह है जो चरित्रहीन लोग करते हैं, हम जो करते हैं वह कुछ और ही है। माकपा पोलित ब्यूरो से वीएस अच्युतानंदन के निष्कासन और प्रो सभरवाल हत्याकांड में भाजपा की राज्य सरकार की भूमिका क्या यही नहीं बताती।

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  • Web Title:चाल, चरित्र, चेहरा