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31 अगस्त तक सुप्रीम कोर्ट को सौंपनी है रिपोर्ट

फायर सिक्योरिटी सिस्टम को लेकर सुप्रीम कोर्ट का डंडा चलने जिला शिक्षा विभाग की नींद हराम हो गई है। कोर्ट द्वारा 31 अगस्त रिपोर्ट सौंपने की समय सीमा तय करने से सरकारी स्कूलों की चिंता इस बात को लेकर और बढ़ गई है कि इसके नाम पर अभी तक किसी तरह का फंड रिलीज हुआ ही नहीं।


सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनजर फायर सेफ्टी को लेकर जिला प्रशासन की मंगलवार को बैठक हुई। बैठक में जिला शिक्षा विभाग को 31 जुलाई तक सभी निजी और सरकारी स्कूलों के सव्रे कराने का निर्देश दिया गया। बैठक में जिला शिक्षा विभाग से जिला विद्यालय निरीक्षक ज्योति प्रसाद और बीएसए डा. धर्मवीर सिंह भी थे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर माध्यमिक शिक्षा परिषद के 45 एडेड,74 अनएडेड, 2 गवर्नमेंट और सीबीएसई और आईसीएसइ के 54 स्कूलों में फायर सेफ्टी उपकरण लगाए जाएंगे। उसी तरह बेसिक शिक्षा परिषद् के भी सभी 1470 प्रथामिक विद्यालयों के फायर सेफ्टी के इंतजाम होंगे। हालांकि तमिलनाडु के चेन्नई के पास एक स्कूल में आग लगने से आहत डीपीएस,रेयान इंटरनेशनल, कैम्ब्रिज, एमिटी इंटरनेशनल स्कूल ने अपने यहां फायर सेफ्टी के इंतजाम का दावा किया है।


इसके बावजूद डीआईओएस ने क्रास चेकिंग के तौर पर सरकारी स्कूलों के साथ-साथ निजी स्कूलों के भी फायर सेफ्टी संबंधी जांच कराने की बात कही है। उनके अनुसार इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में बनी कमेटी की पहल पर फायर सेफ्टी की व्यवस्था के लिए स्कूलों को सव्रे कराया जाएगा। सर्वे के लिए कमेटी की सिफारिश पर क्षेत्र के सीओ,फायर विभाग के अधिकारी और शिक्षकों की टीम स्कूलों का निरीक्षण कर फायर सेफ्टी संबंधी रिपोर्ट डीएम को सौपेगी। डीएम की रिपोर्ट पर ही शासन से फायर सेफ्टी के लिए फंड रिलीज कराया जाएगा।
अमरेश कुमार तिवारी

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