अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

थैला भर पैसे, मुट्ठी भर चीनी

‘आइए चाय पीते हैं’ यह वक्त आमजनों की जुबान से लगभग गायब होता ज रहा है और वजह है पिछले एक वर्ष के दौरान चीनी की कीमतों का

आसमान छूना, आंकड़ों पर नजर दौड़ाई जाए तो पिछले वर्ष से अब तक 40-45 प्रतिशत मूल्य वृद्धि हो चुकी है। बाजार में खुली चीनी 26-30

रुपये प्रति किलो उपलब्ध है। जनसाधारण अगर गुणवत्ता पर ध्यान दे तो जेब हल्की और अगर कम कीमत पर चीनी ले तो गुणवत्ता नहीं, इंसान जाए तो जाए कहां? मनोज कुमार ने सत्तर के दशक में रोटी कपड़ा और मकान नामक फिल्म बनाई, जिसमें एक गीत के दौरान प्रेमनाथ कहते हैं- पहले मुट्ठी भर पैसे लेकर जाते थे और थैला भर चीनी लाते थे और अब थैला भर पैसे लेकर जाते हैं और मुट्ठी भर चीनी लाते हैं।

शक्तिवीर सिंह ‘स्वतंत्र’, जमिया मिलिया

गौर फरमाइए हुजूर

क्रिकेट के सबसे मजेदार व करीबी मुकाबले भारत-पाक के बीच होते आए हैं। दोनों देशों के क्रिकेट प्रेमी दीवानगी की हद तक अपने देश की टीमों

का हौसला बढ़ाते हैं। पर गत वर्ष आतंकी हमलों की वजह से दोनों देशों के बीच एक भी वनडे सीरीज नहीं हुई है। यह सर्वविदित है कि 2003-04

में भारतीय टीम ने जब पाक दौरा किया था, तब भी सीरीज पर आतंकी साया मंडरा रहा था, पर इस दौरे ने दोनों देशों के आपसी मतभेदों को दूर

करने में सबसे ज्यादा सहायता की। ऐसे में यदि खेल दो देशों के आपसी संबंधों को बेहतर बना सकता है तो इन्हें बढ़ावा क्यों नहीं दिया जाता?

आरती टैगोर,  नई दिल्ली

हिन्दुस्तानी सा कोई नहीं

यदि दुनिया भर में फैले मुसलमानों की गुणवत्ता का आकलन करें तो भारत का मुसलमान उनमें सर्वश्रेष्ठ है। अन्य धर्मावलंबियों के साथ सहज व

सामान्य भाव से कैसे रहा जाए, इसका उदाहरण दुनिया के सारे मुसलमान भारत की गंगा-जमुना संस्कृति से सीख सकते हैं। विश्व में जितने टीवी

या रेडियो पर इस्लाम संबंधी कार्यक्रम उर्दू में आते हैं वे अधिकांशत: उन पाकिस्तानी विद्वानों को बुलाते हैं जो अमेरिकी पाकिस्तानी होते हैं। उनमें

एक बू यह आती है कि चूंकि अमेरिका ने इन्हें सुविधाएं दे रखी है, इसलिए ये मॉडर्न इस्लाम की बात स्वार्थ के वशीभूत हो करते हैं। इनमें यदि

भारतीय इस्लामिक विद्वानों को मौका दिया जाए तो वे अधिक अच्छे प्रमाणित हो सकते हैं। आपके माध्यम से मैं भारतीय इस्लामिक विद्वानों से प्रार्थना

करूंगा कि वे भी अपना एक चैनल चलाएं जिसमें समन्वयवाद पर चर्चा इस्लाम के भारतीय भाष्य में हो तथा खुलकर उन कट्टरपंथी खुराफातियों की गलत व्याख्या को पवित्र कुरआन की रोशनी में विश्व के सामने लाएं।

वी. एस. शेखावत, दिल्ली

महंगाई बोली स्वामी से

आम आदमी अपनी झुकी कमर के साथ सामने सीना ताने खड़े विशालकाय कद के स्वामी, महंगाई से कह रहे थे, ‘तूने तो मेरी कमर ही तोड़ दी।

अब मैं ठीक से खड़ा भी नहीं हो सकता।’ इस पर महंगाई बोली, ‘पर तुम लोगों ने ही तो मुङो इस मुकाम तक पहुंचाया है।’

प्रवीण कुमार ‘रोशन’, पालोजोरी

 

याद आई नानी
वो कागज की कश्ती
वो बारिश की पानी.
बची बस कहानी
मानसून ने याद
दिला दी नानी

वीरेन कल्याणी, विश्वास नगर, शाहदरा

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:थैला भर पैसे, मुट्ठी भर चीनी