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खेल-खेल में ही बनारस पहुंचा

खेल-खेल में मोहब्बत की नगरी आगरा से धार्मिक नगरी काशी पहुंच गया आठ वर्षीय बालक मोहम्मद मेराज। अब पिता मोहम्मद कमरुद्दीन और मां अमीना खातून की याद आते ही फूट-फूट कर रोने लगता है। खोचवां (मिज्रमुराद) की पूर्व ग्राम प्रधान केशरा देवी और उनके पड़ोसी होरीलाल दस दिन से उसे खिलाने-पिलाने के अलावा यथासंभव प्यार देने के साथ उसे ढाढ़स बंधाए हैं कि अम्मी-अब्बा से मिलावा देंगे।


बकौल मेराज, उसका पिता रिक्शा चलाता है। घर के करीब ही रेलवे स्टेशन है। रुकी ट्रेंनों में चढ़ना-उतरना उसका खेल था। एक दिन ट्रेन में चढ़ा, कुछ देर उसी में खेला। लेकिन ट्रेन ज्यादा समय तक रुकी रही। इस बीच उसे नींद आ गयी और वह बोगी में ही सो गया। नींद खुली तो ट्रेन भागती मिली। उसने रोते-रोते सवारियों से अपनी बात बतानी चाही, लेकिन सभी उसे इशारे से आगे बढ़ने को बोल देते। ट्रेन बनारस पहुंची, तो वह उतर गया। भटकते-भटकते स्टेशन के बाहर आ गया और रोडवेज की ओर पहुंच गया।


रोडवेज पर कंडक्टर आगरा-आगरा चिल्ला रहे थे। अपने घर का नाम सुनकर वह बस में बैठ गया। रास्ते में कंडक्टर ने किराया मांगा, तो उसने अपनी आपबीती सुनाई। लेकिन कंडक्टर ने रूपापुर (मिज्रमुराद) रोड पर उसे बस से उतार दिया। मेराज सड़क पर रोते हुए भटकता रहा। भूख लगी, तो लोगों के सामने हाथ फैला दिया और जो मिला, खा लिया। इसी बीच कुछ लोग बालक को पूर्व ग्राम प्रधान और उनके पड़ोसी के पास पहुंचा दिए। दस दिन से मेराज इन्हीं के पास है। मेराज ने बताया कि उसका परिवार जम्मू-कश्मीर में रहता था, पिछले कुछ वर्ष से आगरा आए हैं। मां-बाप बातचीत में इसका जिक्र करते थे, तब सुना था। थाने में सूचना दे दी गयी है और बालक खोचवां में ही है।

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