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पुलिसवाले अपने ही जाल में फंस गए

चार युवकों को डकैती के मामले में लपेटने के प्रयास में सात पुलिसवाले खुद ही नप गए। अदालत ने डकैती की योजना बनाने के आरोप में धरे गए युवकों को तो बरी कर दिया। मगर पुलिसवालों को झूठ का पुलिंदा तैयार करने का आरोपी पाया। कड़कड़डूमा स्थित एडिशनल सेशन जज अतुल कुमार गर्ग की अदालत ने न्यू अशोक नगर थाने के एक सबइंस्पेक्टर समेत 7 पुलिसकर्मियों के खिलाफ झूठे साक्ष्य गढ़ने और झूठी गवाही देने के आरोप के तहत कानूनी कार्रवाई का नोटिस जारी किया है। बहरहाल कानूनी घेरे में आए पुलिसकर्मियों ने सत्र अदालत के आदेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में पुर्नविचार याचिका दायर की है। साथ ही पुलिसकर्मियों की तरफ से सुनवाई अदालत में अर्जी दी गई है कि जबतक हाईकोर्ट का पुर्नविचार याचिका पर निर्णय नहीं आता, उनके खिलाफ कानूनी कदम न उठाया जाए। पुलिसकर्मियों की अर्जी पर गुरुवार को सुनवाई होगी।
पेश मामले के अनुसार पूर्वी दिल्ली की न्यू अशोक नगर थानापुलिस ने 27 जून 07 को दल्लुपुरा, पेट्रोल पंप की झाड़ियों से डकैती की योजना बनाने के आरोप में जॉनसन, गोविंद,अनिल और जगन नामक युवकों को पकड़ने का दावा किया। मामला जब गवाहों के बयान दर्ज होने की प्रक्रिया पर पहुंचा, तो अभियोजन की कहानी धराशायी हो गई। दरअसल अभियोजन के सभी गवाह पुलिसकर्मी थे। बावजूद इसके गवाहों के बयानों में स्पष्ट विरोघाभास था। खासतौर पर मौका-ए-मुआयना पर तैयार दस्तोवजों को लेकर गवाहों के बयान उलझ गए। सवाल फिर वही उठा कि यदि पुलिसकर्मियों ने कागजत तैयार नहीं किए, तो क्या इन दस्तोवजों पर भूत की लिखावट है। अदालत ने पुलिस के कारनामें को संज्ञान में लेते हुए आरोपियों को बरी कर दिया। लेकिन इस मामले की जांच में शामिल रहे सब इंस्पेक्टर धर्मपाल, एएसआई शंकर लाल, कांस्टेबल बाले राम, महाबीर सिंह, शाजुद्दीन, महाराज व नरेन्द्र को झूठी का पुलिंदा बनाने क आरोप में पेशी सम्मन जरी कर दिए। अब पुलिसकर्मियों ने निचली अदालत में फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में पुर्नविचार याचिका दायर की है।

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