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दारफुर और कांगो की राह पर पाकिस्तान

पाकिस्तान का उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत तंबूओं के अतिविशालकाय गांव में तब्दील होता दिखाई पड़ रहा है। यह देश बांग्लादेश के जन्म (1और विभाजन (1े बाद अब तक के सबसे बड़े जन पलायन की कगार पर है। ताजा आकलन बताते हैं कि आतंकवाद की मार से घर-बार छोड़ने वालों की संख्या 15 लाख पार कर सकती है। लॉस एंजिल्स टाइम्स को दिए साक्षात्कार में संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान तेजी से दारफुर और कांगो जसे हालात की ओर बढ़ रहा है। कभी स्वात की राजधानी मिंगोरा में फल बेचने वाले 42 वर्षीय सरदार अली कहते हैं, ‘पहले तालिबान आए और फिर सेना। इसके बाद शुरू हुईं हमारी मुसीबतें। तालिबान की रुखसती में ही हम शांति की उम्मीद कर सकते हैं।’ इस्लामाबाद से 12किमी उत्तर-पश्चिम में स्वात घाटी के बाहर पहले मुख्य शहर मरदान में राज्य सरकार द्वारा आंतरिक विस्थापितों के लिए बने धूल-धूसरित तंबुओं में मौजूद ज्यादातर लोग अली के इस सीधे-सपाट फामरूले को सही बताते हैं। घाटी से हाारों हाार लोग जान बचाकर यहां पहुंचे हैं। लेकिन इससे ज्यादा अब भी तालिबान और सुरक्षा बलों के घमासान के बीच फंसे हुए हैं। अली बताते हैं कि उनके ऐन पड़ोस में बम फटा और 35 लोगों की जान चली गई। उनके पास बीवी और पांच बच्चों को लेकर भागने के सिवाय और कोई चारा नहीं बचा। जिंदा रहने की तसल्ली के साथ वह कहते हैं, ‘अब हमार पास सिर्फ हमारी जिंदगी बाकी है।’ यहां ज्यादातर शरणार्थियों के पास अब कोई और चारा नहीं है। स्वात छोड़कर भागने वालों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी है जो अपने दूर-दराज रिश्तेदारों के घर पनाह ले चुके हैं। कई कराची तक पहुंच गए हैं। इन लोगों के साथ बातचीत में उनकी दर्दनाक दास्तान छनकर बाहर आ जाती है। शाह शेजाद तंबू नगर में रह रहे लोग बमबारी का शिकार बनी कारों और बसों के बार में बताते हैं कि किस तरह मर्दो-औरतों व बच्चों के शव सड़कों पर सड़ रहे हैं। पीछे छूट गए रिश्तेदारों की चिंता उन्हें खाए जा रही है।ं

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