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वरुण के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल

वरुण के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद वरुण गांधी के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के मामले में बुधवार को पीलीभीत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रकाश ने यह जानकारी दी। 160 पृष्ठों का यह आरोप पत्र मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विपिन कुमार की अदालत में यहां दाखिल किया गया।

न्यायालय ने वरुण गांधी को 17 अगस्त को अदालत में मौजूद रहने के लिए सम्मन जारी किया। आरोप पत्र में 35 से अधिक लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं। प्रकाश ने बताया कि वरुण गांधी को भारतीय दंड विधान की धारा 153 (ख), 295 (क), 505 (2) और 125 के तहत आरोपित किया गया है। 153 (ख) में दो समुदायों के बीच विद्वेष पैदा करने का मामला दर्ज होता है। इसमें पांच वर्ष तक की सजा का प्रावधान है, जबकि 295 (क) में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना होता है। इसमें तीन वर्ष की सजा या जुर्माना अथवा दोनों की सजा सुनाई जा सकती है।

उन्होंने बताया कि वरुण गांधी को धारा 505 (2) में भी आरोपित किया गया है। इसमें दो समुदायों में विद्रोह पैदा करने की कोशिश करना आता है। इसमें भी तीन वर्ष तक की कैद अथवा अर्थदण्ड या दोनों की सजा सुनाई जा सकती है। इन धाराओं के अलावा वरुण गांधी को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत भी आरोपित किया गया है।

गौरतलब है कि पीलीभीत के जिला प्रशासन ने विशेष संदेशवाहक से राज्य सरकार को गत 25 जून को पत्र भेजकर वरुण गांधी के खिलाफ भड़काऊ भाषण के मामले में मुकदमा चलाए जाने की अनुमति मांगी थी।

राज्य सरकार ने यह मामला न्याय विभाग को संदर्भित कर दिया था और मामले की संवेदनशीलता तथा उसके राजनीतिक स्वरूप को देखते हुए विशषज्ञ से सलाह मांगी थी।

लगभग एक सप्ताह तक मामले के अध्ययन के बाद न्याय विभाग ने मुकदमा चलाए जाने के लिए हरी झण्डी दे दी थी जिस पर सरकार ने तीन जुलाई को अपनी अनुमति दे दी थी। पीलीभीत जिला प्रशासन ने यह अनुमति तब मांगी जब फोरेंसिक जांच रिपोर्ट में यह पाया गया कि वरुण गांधी के भड़काऊ भाषण मामले की सीडी से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई और उनकी आवाज सीड़ी की आवाज से मेल खाती है।

वरुण गांधी द्वारा अपनी आवाज का नमूना देने से मना करने के बाद राज्य सरकार ने उनकी आवाज के तीन नमूने पुष्टि के लिए चंडीगढ़ स्थित फोरेंसिक प्रयोगशाला को भेजे थे। इससे पूर्व वरुण गांधी ने सीडी के साथ छेड़छाड़ कर अपने खिलाफ राजनीतिक साजिश रचने का आरोप लगाया था।

अपने संसदीय क्षेत्र पीलीभीत के बड़खेरा में गत आठ मार्च को भड़काऊ भाषण देने के आरोप में 28 मार्च का वरुण गांधी को गिरफ्तार किया गया था। दूसरे दिन 29 मार्च को ही उन पर रासुका लगा दिया गया और पीलीभीत जेल में बंद कर दिया गया जहां से 31 मार्च की रात उन्हें एटा जेल भेज दिया गया। एटा जेल से उन्हे 16 अप्रैल को सशर्त छोड़ा गया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में यह लिखकर दिया कि वह भविष्य में भड़काऊ भाषण नही देंगे।

उनके खिलाफ पीलीभीत के विभिन्न थानों में भड़काऊ भाषण देने के आरोप में कुल तीन मुकदमें दर्ज हुए थे। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान ही सलाहकार परिषद ने वरुण गांधी पर से रासुका हटा दिया था।

इधर, भारतीय जनता पार्टी ने वरुण गांधी के खिलाफ आरोप पत्र को राजनीति से प्रेरित बताया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डा रमापति राम त्रिपाठी ने कहा कि वरुण गांधी के प्रति राज्य सरकार पूर्वाग्रह से ग्रस्त है। इसी कारण एन केन प्रकारेण वरुण गांधी को फंसाने की साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है। वरुण गांधी को अभी तक कोर्ट से ही राहत मिली है और विश्वास है कि आगे भी उन्हें न्याय मिलेगा।

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