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फ्लिंटॉफ ने टेस्ट क्रिकेट को कहा अलविदा

फ्लिंटॉफ ने टेस्ट क्रिकेट को कहा अलविदा

इंग्लैंड के करिश्माई हरफनमौला एंड्रयू फ्लिंटॉफ ने बुधवार को एशेज सीरीज खत्म होने के बाद टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा कर दी जिससे फिटनेस समस्याओं और विवादों से भरे उनके एक दशक लंबे टेस्ट कैरियर का समय से पहले अंत हो गया।

इंग्लैंड के पूर्व कप्तान फ्लिंटॉफ का गुरुवार से शुरू होने वाले दूसरे टेस्ट में खेलना संदिग्ध है। उन्होंने कहा कि पिछले दो साल से लगातार चोटों से आजिज आकर उसने यह फैसला लिया है। वह वनडे और टवेंटी 20 मैच खेलते रहेंगे।

फ्लिंटॉफ ने पत्रकारों से कहा कि मेरे शरीर ने मुझसे कहा है कि अब रुकने का समय आ गया है। 2005 से मैं लगातार चोट से जूझ रहा हूं। उन्होंने कहा कि पिछले चार में से दो साल मैने रिहैबिलिटेशन में बिताए हैं। मैं अपने, परिवार और टीम के लिए अब इस पर विराम लगाना चाहता हूं। उन्होंने कहा कि मैं लंबे समय से इसके बारे में सोच रहा हूं। अब घुटने की चोट के बाद मैंने टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला ले लिया।

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 1998 में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण करने के बाद से फ्लिंटॉफ का कैरियर चोटों से प्रभावित रहा है। वह इंग्लैंड के पिछले 48 में से 25 टेस्ट चोट के कारण नहीं खेल पाए।

टेस्ट क्रिकेट में फ्लिंटॉफ ने 31.69 की औसत से 3708 रन बनाए हैं और 219 विकेट भी लिए हैं। वनडे में 32.01 की औसत से 3394 रन बनाने के अलावा उन्होंने 169 विकेट भी चटकाए हैं। भारत के खिलाफ हालांकि उनका प्रदर्शन उम्दा नहीं रहा है। वह 11 टेस्ट में 473 रन ही बना सके और 29 विकेट उनकी झोली में आए। भारत के खिलाफ 30 वनडे मैचों में उन्होंने 708 रन बनाए और 37 विकेट लिए।

आस्ट्रेलिया के खिलाफ 18 बरस बाद इंग्लैंड को 2005 में एशेज जीत दिलाने वाले फ्लिंटॉफ पिछले दो साल से आशातीत प्रदर्शन नहीं कर पा रहे थे। लंकाशर के इस खिलाड़ी ने कहा कि वह मौजूदा एशेज सीरीज के बाकी मैच खेलना चाहते हैं। ड्रा पर छूटे पहले मैच के दौरान हालांकि उनके घुटने में चोट लग गई थी। उन्होंने कहा कि अगले चार टेस्ट खेलने के लिए मैं भरसक कोशिश करूंगा। मैं अपना योगदान देने को बेकरार हूं।

फ्लिंटॉफ ने कहा कि मैं जीत के साथ टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहना चाहता हूं। यदि शरीर इजाजत देता है तो मैदान पर जल्दी उतरूंगा। उन्होंने कहा कि मेरी एड़ी के चार आपरेशन हो चुके हैं। दो महीने पहले ही घुटने का आपरेशन हुआ है। मेरा शरीर अब टेस्ट क्रिकेट खेलने की इजाजत नहीं देता। चोटों के अलावा फ्लिंटॉफ विवादों से भी घिरे रहे हैं जिनमें भारत के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली के साथ तकरार शामिल है।

लंकाशर के लिए खेलने के दौरान गांगुली और फ्लिंटॉफ की कभी नहीं पटी। फिर 2002 में फ्लिंटॉफ ने मुंबई में मैच के दौरान कमीज उतारकर घुमाते हुए गांगुली को चिढ़ाया तो प्रिंस ऑफ कोलकाता ने नेटवेस्ट सीरीज जीतने के बाद लार्ड्स की बालकनी पर खड़े होकर उन्हें उसी अंदाज में जवाब दिया।

वर्ल्ड कप 2007 के दौरान वेस्टइंडीज में वह अपने कुछ साथी खिलाड़ियों के साथ नशे की हालत में नौका पर तफरीह करने चले गए। मौजूदा एशेज सीरीज से पहले बेल्जियम दौरे पर वह फिर सुर्खियों में आए जब वह टीम बस पकड़ने से चूक गए। इंग्लैंड की 2005 एशेज जीत के बाद फ्लिंटॉफ को एमबीई सम्मान से नवाजा गया। उसी साल उन्होंने जैक्स कालिस के साथ आईसीसी के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर का पुरस्कार बांटा। दिसंबर 2005 में उन्हें बीबीसी स्पोटर्स पर्सनैलिटी ऑफ ईयर चुना गया।

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