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धनराज को आज भी है सम्मानजनक विदाई का इंतजार

धनराज को आज भी है सम्मानजनक विदाई का इंतजार

अपने सोलह बरस के कैरियर में कई उतार-चढ़ाव देख चुके करिश्माई फारवर्ड धनराज पिल्लै को मलाल है कि अंतरराष्ट्रीय हाकी को अलविदा कहने की घोषणा करने का उन्हें मौका ही नहीं दिया गया और उन्हें आज भी इसका इंतजार है।

गुरुवार को अपना 41वां जन्मदिन मनाने जा रहे पूर्व कप्तान ने इंटरव्यू में कहा कि मुझे सम्मानजनक विदाई का मौका नहीं दिया गया। मुझे ही क्या जफर इकबाल, सुरजीत सिंह, परगट सिंह, अशोक कुमार जैसे दिग्गज खिलाड़ियों को भी यह मौका मयस्सर नहीं हुआ। मुझे एक मौका तो मिलना चाहिए था कि मैं सम्मानजनक तरीके से हाकी को अलविदा कह सकूं।

बुसान एशियाड 2004 में आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले इस खिलाड़ी ने कहा कि मैं चयनकर्ता की कुर्सी पर बैठकर खिलाड़ियों को मैदान पर खेलते देखता हूं तो मन में कसक सी उठती है। एक महीने के अभ्यास से मैं फिर अंतरराष्ट्रीय हाकी खेल सकता हूं। विदेशी लीग और घरेलू स्तर पर आखिर मैं खेलता ही रहा हूं।

भारतीय ओलंपिक संघ की पूर्व तदर्थ समिति द्वारा चयन समिति में शामिल किए गए धनराज ने भंग आईएचएफ के अध्यक्ष केपीएस गिल से हाकी इंडिया के हाथ मिलाने और राष्ट्रीय टीम के लिए विदेशी कोच की नियुक्ति समेत हाकी के मौजूदा हुक्मरानों की कार्यप्रणाली पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि हाकी इंडिया के गठन और विदेशी कोच की नियुक्ति के बारे में हमें मीडिया से ही पता चला और तो और आईओए ने अब उन्हीं केपीएस गिल से हाथ मिला लिया जिन्हें पिछले साल हटाया गया था।

चार ओलंपिक, चार वर्ल्ड कप, चार एशियाड और चार चैम्पियंस ट्राफी खेलने वाले इस खिलाड़ी ने कहा कि पता नहीं हमारी हाकी किस दिशा में जा रही है। हाकी इंडिया के गठन के बारे में हमें अखबारों से पता चला। फिर गिल साहब से आईओए ने हाथ क्यों मिला लिया, मेरी समझ से परे है। उन्होंने कहा कि हमें सिर्फ चयन संबंधी मसलों के बारे में इल्म रहता है। बाकी भारतीय हाकी में क्या हो रहा है, हमें कुछ नहीं पता लेकिन जो कुछ भी हो रहा है, उससे हम संतुष्ट नहीं हैं।

बैंकाक एशियाड 1998 में स्वर्ण पदक जीतने के बावजूद कप्तानी और टीम में स्थान गंवाने वाले धनराज और गिल की अध्यक्षता वाले पूर्व आईएचएफ के मतभेद जगजहिर थे। उन्होंने कहा कि अपने पूरे कैरियर में उनके साथ वैसा बर्ताव नहीं हुआ, जिसके वह हकदार थे। उन्होंने कहा कि मेरे साथ जो हुआ, सो हुआ, लेकिन मैं नहीं चाहता कि नए खिलाड़ियों के साथ भी ऐसा हो। खिलाड़ियों और हाकी प्रशासन के बीच मतभेद नहीं होने चाहिए।

विदेशी कोचों की नियुक्ति के खिलाफ रहे धनराज स्पेनिश कोच जोस ब्रासा के आने से भी ज्यादा उत्साहित नहीं है। उन्होंने कहा कि ब्रासा की नियुक्ति के बारे में भी हमें कुछ पता नहीं था। फिर अचानक खबर आई कि वह पद संभाल रहे हैं। उस समय हालांकि प्रभारी कोच (हरेंद्र सिंह) अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे और भारत ने अजलान शाह कप भी जीता था।

जून में एशिया कप के दौरान टीम मैनेजर रहे धनराज ने कहा कि उस समय नए कोच के आने की अटकलें लगाई जा रही थी लिहाजा खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर असर पड़ा होगा जिससे हम अच्छा नहीं खेल पाए।

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