DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

नरेगा के कारण बंद हो रही है कानपुर की दाल मिलें

केन्द्र सरकार की राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी योजना (नरेगा) के तहत मजदूरों को घर में ही रोजगार दिला देने से उन्हें भले ही सुविधा हो गयी हो लेकिन इससे कानपुर की दाल मिलों को ग्रहण लग गया और मजदूर न मिलने की वजह से पिछले एक साल में शहर की करीब 15 दाल मिलें बन्द हो गयीं तथा कुछ और मिलें बंद होने की कगार पर हैं ।

दाल मिल मालिकों का कहना है कि लगभग तीन करोड़ रूपये की लागत से दाल मिल खोलने के बाद वे 200 रूपये प्रति दिन के हिसाब से मजदूरों को मजदूरी देने को तैयार है लेकिन इसके बावजूद मजदूर घर से दूर आकर दाल मिलों में काम करने आने को तैयार नही है। उनके अनुसार समय पर बिजली न मिलना, कच्चे माल की कमी और सही समय पर फसल न मिलना भी दाल मिलों की दुर्दशा का एक बहुत बड़ा कारण है । मिल मालिकों का कहना है कि इन्हीं सब दिक्कतों के चलते पहले 500 क्विंटल प्रति दिन का उत्पादन करने वाली दाल मिलें अब बड़ी मुश्किल से केवल 200 क्विंटल प्रति दिन का उत्पादन कर रही हैं ।
    

कानपुर दाल मिलर्स एसोसिएशन के संरक्षक और शहर की कई दाल मिलों के मालिक प्रमोद जायसवाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कुल 500 दाल मिलें है जिसमें से सर्वाधिक 164 दाल मिलें कानपुर शहर में है और कानपुर उत्तर प्रदेश में दाल मिलों का सबसे बड़ा केन्द्र है । इसके अतिरिक्त कानपुर में ही करीब 200 छोटी दाल मिलें ऐसी हैं जो बिना रजिस्ट्रेशन के काम चलाती हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:नरेगा के कारण बंद हो रही है दाल मिलें