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बिहार में क्रियान्वयन में अनियमितता

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने बिहार में केन्द्र प्रायोजित योजनाओं के क्रियान्वयन में घोर अनियमितता को उजागर किया है। बिहार के प्रधान महालेखाकार (लेखा परीक्षा) अरुण कुमार सिंह ने बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में 31 मार्च 2008 की कैग रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि केन्द्र प्रायोजित प्राथमिक शिक्षा स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना और त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम समेत कई अन्य योजनाओं में अनियमितता का पता चला है।

उन्होंने कहा कि प्राथमिक शिक्षा के लिए अगस्त 1995 में पोषकीय समर्थन योजना शुरु की गई थी जिसे मध्याह्न भोजन योजना के रुप में जाना जाता है। इसका उद्देश्य छात्रों का नामांकन विद्यालय में ठहराव तथा उपस्थिति में वृद्धि के साथ-साथ उनकी पोषकीय स्थिति में सुधार कर प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमिकरण को प्रोत्साहित करना था।

श्री सिंह ने कहा कि विद्यालयों को निधि एवं खाद्यान्न उपलब्ध कराने संबंधी विहित मानकों के अभाव के परिणामस्वरुप इस योजना के कार्यान्वयन में विलंब एवं व्यवधान हुआ।

खाद्यान्नों के लेख को विभिन्न चरणों में सामंजित नहीं किया गया एवं प्रतिवेदिन आंकड़ें की सत्यता सुनिश्चित नहीं की गई थी। उसी तरह मध्यान्ह भोजन की गुणवता एवं मात्रा की जांच भी कभी नहीं की गई। उन्होंने कहा कि जिला शिक्षा अधीक्षकों के पास पर्याप्त निधि की उपलब्धता के बावजूद रसोई सेड रसोई उपकरण पकाने एवं परोसने के बर्तन पर्याप्त रुप से नहीं दिए गए।

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