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शॉपिंग, कहीं बीमारी ना बन जाए

शॉपिंग, कहीं बीमारी ना बन जाए

कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें शॉपिंग करने में बहुत मजा आता है। शॉपिंग करना उनकी आदत-सी बन जाती है। चाहे उन्हें शॉपिंग की जरूरत हो या नहीं, सप्ताह में एक-दो बार वे शॉपिंग के लिए ना जाएं तो उन्हें खाना हजम नहीं होता। अगर उन्हें कोई चीज पसंद आ जाती है, चाहे उन्हें उसकी बहुत ज्यादा जरूरत नहीं है तो भी वे बिना सोचे-समझे उसे खरीद लेते है। शॉपिंग करना बुरी आदत नहीं, लेकिन शॉपिंग एक शड्यूल बना कर प्लान की जाए और पहले से ही निर्धारित किया जाये कि कब, क्या, कहां से, लेना है तो समझदारी के साथ फालतू चीजों की शॉपिंग करने से बचा जा सकता है।

‘कन्फेशन ऑफ ए शोपाहोलिक’नामक एक फिल्म में नायिका को शॉपिंग मेनिया होता है, जिस कारण उसे कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। वह बाजार से लोन लेती है व बहुत से लोगों की कर्जदार भी बन जाती है। लेकिन अपना कर्ज समय पर न चुकाने के कारण अंत में उसके कपड़े और बेशकीमती चीजों तक को नीलाम कर दिया जाता है। इस फिल्म को देख कर ऐसा लगता है जैसे ये फिल्म भारतीय समाज के युवाओं को केंद्र में रख कर ही बनाई गई है।  हमारा आज का युवा वर्ग-खासतौर पर महिलाएं शोपाहोलिक नामक मेनिया से ग्रस्त दिखाई पड़ती हैं।

युवा वर्ग अपने खचरें पर चाहकर भी कंट्रोल नहीं कर पाता। और धीरे-धीरे शॉपिंग की यह आदत एक बीमारी का रूप ले लेती है। खासकर लड़कियों को यह बीमारी कुछ ज्यादा ही घेरती है।  शॉपिंग के इस मेनिया से पीछा छुड़ाने के लिए, इससे बचने के लिए हमने एच.एम.आर.इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी एंड मैनेजमेंट में मार्केटिंग की 25 वर्षीय टीचर आस्था कंजालिया से और 47 वर्षीया मनोचिकत्सक पूनम से बात की। वे दोनों ही इस बात से इत्तेफाक रखती हैं कि आज भारतीय समाज में शॉपिंग एक बीमारी का रूप लेती जा रही है। आस्था और पूनम ने लड़कियों और महिलाओं को इस बीमारी से बचने के कुछ कारगर टिप्स भी दिये। अगर आपको भी लगता है कि आप शॉपिंग मेनिया से ग्रस्त होती जा रही हैं तो इन टिप्स को अपना कर इस मेनिया से बाहर आ सकती हैं।
ल्ल आपको टाइम पास के लिए शॉपिंग नहीं करनी चाहिए। अगर आप टाइम पास करना ही चाहती हैं तो आप विंडो शॉपिंग कर सकती हैं और जरूरत पड़ने पर आप उन चीजों को खरीद सकती हैं, जो आपने पहले पसंद की हैं। या फिर आप अपना समय व्यतीत करने के लिए शॉपिंग की बजाय कुछ क्रिएटिव भी कर सकती हैं।

सेल के पीछे न भागें, जहां भी सेल देखी उत्साहित होकर सस्ते के चक्कर में स्टोर करने वाली चीजों की शॉपिंग से बचना चाहिए। अपनी आर्थिक स्थिति को ध्यान रखकर जरूरत की चीजें ही पहले खरीदें।
 
शॉपिंग करते समय क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड का बिल्कुल भी प्रयोग न करें। बच्चों को क्रेडिट कार्ड की आदत न डालें।

शॉपिंग हमेशा प्लान करके जाएं और बहुत ज्यादा पैसे ना लेकर जाएं।

अपनी प्राथमिकताओं को तय करें कि आपके लिए क्या चीजें अधिक महत्वपूर्ण हैं।

अगर आप बहुत ज्यादा नहीं कमाते तो ब्रांडेड चीजों के बदले लोकल मार्केट को शॉपिंग के लिए चुनें।

शेयरिंग की हैबिट्स डालें। अगर आपको कोई चीज सिर्फ एक-दो बार ही प्रयोग में लानी है तो अपने दोस्तों से वह चीज मांगने में झिझक महसूस न करें।

अपनी आय और खर्चे के लिए एक डायरी मेंन्टेन करें, जिसमें पूरे महीने की कमाई व खर्च का ब्यौरा व बचत का शड्यूल बनायें। और महीने के अंत में देखें कि आपने क्या फिजूल खर्च किया है व कितनी बचत की। इस हिसाब से अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग करें।

मनी सेविंग की हैबिट डालें व अपना एकाउंट जरूर मेनटेन करें, ताकि आपको भविष्य में कोई महंगी चीज खरीदने में आसानी हो।

अगर आपके खर्चे चाह कर भी नहीं रुक पा रहे हैं तो अतिरिक्त कमाई का प्रयास करें।

अपना शड्यूल बनाने में अगर आपको कोई समस्या आ रही है तो आप अपने परिवार के सबसे नजदीकी सदस्य या दोस्त की मदद ले सकती हैं।

अगर किसी महीने में आपके घर में कोई पार्टी होने वाली है तो उस पार्टी के लिए महीने की शुरुआत में ही बजट मेनटेन करके रखें, हर समय फैशन के पीछे न भागें। फैशन का विरोध करना भी सीखें।

अगर आपके घर में कोई ‘शोपाहोलिक’ मेनिया से ग्रस्त है तो आप उससे संवाद स्थापित करके उसे समझाने की कोशिश करें व उसे अहसास कराएं कि पैसा कितना महत्वपूर्ण है।

बच्चों को पूरा समय दें, ताकि वो बोर होकर या अपना अकेलानप दूर करने के लिए  शॉपिंग के लिये ना जाएं। और बच्चे को अहसास करायें कि बोरियत दूर करने के लिए वे पेंटिंग, डांस या अपना कोई अन्य पसंदीदा कार्य कर सकते हैं। 

जरूरतों को बढमने के बजाय कम चीजों में ही काम चलाना सीखें व किसी की नकल करके शॉपिंग न करें, इसके लिए आप अपने लाइफ स्टाइल को भी बदल सकती हैं।

शॉपिंग करते हुए किसी बड़े व्यक्ति या अनुभवी को साथ में जरूर लेकर जायें, ताकि आप सही कीमत पर अच्छी चीजों की खरीददारी कर सकें।

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