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आन्ट बोले तो ..

जिस तरह अंग्रेजी में आन्ट माने चींटी भी होता है चाची भी। उसी तरह अपने मौलाना लादेन का मूड भी दोतरफा है। कभी चींटी जैसे विनम्र और शांत.. कभी किसी बिगड़ैल चाची जैसे हवा में लाठी भांजते हुए। कभी शहर के 45 डिग्री टेम्प्रेचर में ईरान के कट्टरवादी और उदारवादी संगठनों जसे भीषण रूप में उबलते हुए, कभी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री खंडूड़ी के इस्तीफे जैसे ठंडे और शांत। न जाने कब ऊंट की तरह किधर की करवट बैठ लें, कोई ठिकाना नहीं। आन्ट बोले तो चींटी भी चाची भी।

स्कूलों, कॉलेजों में लड़कियों के जीन्स पहनने की सरकार द्वारा इजजत पर किसी से भिड़े हुए थे। उनकी नजर में जीन्स और तानपूरे के गिलाफ में कोई फर्क नहीं है। मैं पहुंचा तो अगले को छोड़ कर मुझ पर उबल पड़े। बोले- ‘आप क्या फैसला देंगे भला? जीन्स नाम की मनहूस चीज पहनी है कभी? अमां इतनी टाइट जैसे कैनवस के बोरे में बुरादा ठुंसा हुआ हो। क्या जवान-जहान लड़कियों पर यह नामाकूल पोशाक जेब देती है? साड़ी और सलवार सूट को कौन सी फफूंदी लग गई है कि जीन्स जैसी चीज पहनी जाए? सरकार की अक्ल और फैसले पर खुदा की पनाह। मेरी बेटियों में कोई भी जीन्स पहन ले तो आपकी कसम, अनारकली जैसा जिन्दा दीवार में चुनवा दूं। बदन की तमीज भी कोई चीज होती है कि नहीं?’

अगले ही क्षण पानी की समस्या को लेकर चींटी जैसे विनम्र हो गए। आंखें पोंछ कर बोले- ‘लल्ला मियां, आग लग गई है पानी को। इधर पिघला डालने वाली गर्मी, उधर छोटे-छोटे गरीब बच्चे बोतल भर पानी के तईं तपती धूप में हैंड पम्प पर लाइन में लगे हैं। कलेजा दुखता है मेरा। जब आंख का पानी ही मर गया हो तो बादल-बारिश का क्या रोना। लगे रहो मुन्ना भाई बाल्टी भर पानी की लाइन में..या खुदा।’

अब डायरेक्टली मुझ पर आते हुए मौलाना बोले- ‘लल्ला मियां, आप मुझे दोरुखा समझते हो न। कभी नरम, कभी गरम। कौन नहीं दोरुखा? केन्द्रीय रेलमंत्री जनाबा ममता बनर्जी की मिसाल हाजिर है। माओवादी समस्या को लेकर एक बार बंगाल सरकार पर झपटती हैं कि माओवादियों पर पाबंदी क्यों नहीं लगाई गई? दूसरी ओर यह भी कहती हैं कि माओवादी उन्हें अपना दुश्मन न समझें। काहे से कि माकपा शिकंजे से कई क्षेत्रों को मुक्त करा रहे हैं। यानी बकौल आपके आन्ट माने चींटी भी, चाची थी। मौलाना नरम लाइन पर आ गए। मैं उन्हें नत्था की दुकान पर बेल का ठंडा शर्बत पिलाने ले गया। मौलाना रास्ते भर बेल के शर्बत की तारीफ में कसीदा पढ़ते रहे।

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