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कैंपस बन रहा है अपराधियों का अखाड़ा

दिल्ली विश्वविद्यालय में नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के साथ सितम्बर महीने में होने वाले छात्र संघ चुनाव की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति अपराधियों और लंपट तत्वों के मंच बन गए हैं और परिसर के शैक्षणिक माहौल को बिगाड़ने के साथ-साथ कानून व्यवस्था के लिए भी गंभीर समस्या बन गए हैं। छात्र राजनीति में गिरावट और दिशाहीनता के कारण अपराधी, लंपट, ठेकेदार, जतिवादी, अवसरवादी तत्वों की न सिर्फ घुसपैठ बढ़ी है, बल्कि मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों- कांग्रेस, भाजपा, सपा आदि का भी छात्र संगठनों के जरिए परिसरों के अंदर और छात्र संघों में उनका दबदबा काफी बढ़ गया है। छात्र राजनीति में बाहुबलियों और धनकुबेरों के बढ़ते दबदबे के कारण आम छात्र न सिर्फ राजनीति और छात्र संघों से दूर हो रहे हैं बल्कि वे छात्र राजनीति और छात्र संघों के मौजूदा स्वरूप से भी घृणा करने लगे हैं।
नीरज कुमार, दिल्ली विश्वविद्यालय

सूर्यनमस्कार है वरदान
रक्षा वैज्ञानिकों ने पहाड़ी चोटियों पर तैनात सैनिकों के लिए भी ‘सूर्य नमस्कार’ योगाभ्यास को काफी उपयोगी माना है। मेरी राय में सूर्य नमस्कार सैनिकों और गैर सैनिक दोनों के लिए ही  वरदान है। बशर्ते इस साधना को सही ढंग से किया जाए। यह आसनों में श्रेष्ठ व्यायाम है। जिसमें आसन, मुद्रा, प्राणायाम, सभी के लाभ मिलते हैं केवल गर्भवती महिलाओं को यह आसन वजिर्त है। और वजिर्त है उन धनाढ्यों के लिए जो एसी रूम में बेड पर मोबाइल पास रखकर तेज संगीत चला कर व्यापारिक क्रियाएं भी करते हैं। प्रकृति के इस बहुमूल्य खजने की तौहीन ठीक नहीं।
राजेन्द्र कुमार सिंह, रोहिणी, दिल्ली

भाई ये है मौसम विभाग
भारतीय मौसम विभाग जिस साल देश में अच्छे मानसून की भविष्यवाणी करता है, उस साल सूखे की नौबत आ जाती है। मई माह में विभाग ने सीना फुलाकर बेहद बढ़िया मानसून, समय पूर्व मानसून, देश के सभी हिस्सों में पर्याप्त मानसून जैसी घोषणाएं की थी, और वास्तविकता हमारी आंखों के सामने है। 1 जुलाई से दिल्ली में मानसून के प्रवेश की भी घोषणा की थी, पर 1 जुलाई से 7 जुलाई तक पानी की एक बूंद नहीं बरसी। क्या भारत का मौसम विभाग कल्पना के घोड़े दौड़ाता रहता है?
विनोद कुमार शुक्ला, नेहरू विहार , दिल्ली

ग्राहक का सम्मान करो
ग्राहक सम्मान का पात्र है। उसका अपमान करने वाले घोर भर्तस्ना के पात्र हैं। मेट्रो रेलवे स्टेशन वाले अपने ग्राहकों से भिखारी सा बर्ताव करते हैं। मैंने दिल्ली में मेट्रो में सफर करने के लिए टिकट लिया। वहां काउंटर वाले ने बचे पैसे और टिकट वहां रखे कटोरे में डाल दिए। ये तो बहुत बुरी बात है। पैसे का हमेशा आदर करना चाहिए देने वाले को भी और लेने वालों को भी। पैसा जतन से आता है, इसकी इज्जत करनी चाहिए। दिल्ली मेट्रो वाले ग्राहकों से भिखारियों जैसा वर्ताव न करें। उनके बचे पैसे टिकट हाथ में दें।
दिलीप कुमार गुप्ता, बरेली

क्या होगा इनका?
सम्पन्न लोकसभा चुनावों में भाजपा को जय जय श्रीराम के जप ने भी विजयी भव का आशीर्वाद नहीं दिया। शायद श्री राम ने इनसे मुख मोड़ लिया है। विचारणीय यह है कि अब संघ की सरपरस्ती ने भी असर न दिखाया तो क्या पार्टी माया से भी मरहूम नहीं हो जाएगी?
सजग, रायपुर, छत्तीसगढ़

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