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फ्रांस में पीएम ने लिया भारतीय सेना बैंड का लुत्फ

फ्रांस में पीएम ने लिया भारतीय सेना बैंड का लुत्फ

सम्मान के एक दुर्लभ मौके के तहत प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह फ्रांस के राष्ट्रीय दिवस के मौके पर मंगलवार को हुए समारोह के मुख्य अतिथि थे और उन्होंने वहां वह भव्य परेड देखी जिसमें भारतीय सैनिकों की एक टुकड़ी ने भी सारे जहां से अच्छा की धुन पर कदमताल करते हुए भाग लिया। फ्रांस के राष्ट्रीय दिवस में शामिल होने वाले सिंह पहले भारतीय नेता बन गये हैं।

सिंह ने कहा कि यह दोनों देशों के बीच की मित्रता, सामरिक भागीदारी तथा दोनों राष्ट्रों के सशस्त्र बलों के बीच के सौहार्दपूर्ण संबंधों को दर्शाता है। समारोह में सैन्य परेड निकाली गयी, जिसमें भारत की तीनों रक्षा सेवाओं के 400 सैनिकों की टुकड़ी ने भाग लिया। सैनिकों ने सारे जहां से अच्छा और कदम कदम बढ़ाये ज की धुन पर मार्च किया।

सिंह ने समारोह के बाद एक वक्तव्य में कहा कि हमने जो भव्य परेड देखी वह इस महान राष्ट्र की शक्ित तथा गतिशीलता की परिचायक है। यह समारोह कड़ी सुरक्षा के बीच हुआ। इस मौके पर फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सारकोजी अपनी पत्नी तथा अन्य शीर्ष अधिकारियों के साथ मौजूद थे।

सिंह ने कहा, हमारे सशस्त्र बलों की तीनों सेवाओं की एक टुकड़ी का यहां प्रतिनिधित्व करना तथा परेड की अगुवाई करना भारत के लिये सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि वह फ्रांस के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भाग लेकर काफी सम्मानित महसूस कर रहे हैं।

भारतीय सैनिकों ने चैंप्स इलीसीस में फ्रांसीसी सैनिकों के साथ डेढ़ किलोमीटर तक परेड में भाग लिया। इसमें 90 सदस्यों के सैन्य घोष के बीच जोशीली संगीत धुन बजयी गयी। भारतीय सेना की मराठा रेजीमेंट इस परेड का हिस्सा थी। इस रेजीमेंट की स्थापना 1768 में की गयी थी। उसे द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इटली के अभियान के लिये यूरोप में तैनात भी किया गया था। परेड में आये दर्शकों ने वायु सेना के घोष का भी भरपूर अभिवादन किया।

समारोह में फ्रांस के वायुसेना के विमानों ने देश के ध्वज के तीन रंग लाल, सफेद और नीले को आकाश में उकेरा। सिंह और सारकोजी के साथ कम्बोडिया के प्रधानमंत्री हुन सेन तथा जर्मनी के राष्ट्रपति होस्र्त कोएहलर भी बतौर खास मेहमान मौजूद थे। सिंह ने कहा कि 14 जुलाई की तारीख सिर्फ फ्रांस के लिये नहीं, बल्कि दूसरे देशों के लिये भी महत्वपूर्ण है।

सिंह ने कहा, फ्रांस की क्रांति विश्व इतिहास में एक निर्णायक मोड़ की तरह थी जब आम आदमी ने राजनीतिक तथा सामाजिक जीवन में केंद्रीय स्थान हासिल करने की आकांक्षाओं को जताना शुरू किया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता, समानता तथा भाईचारा फ्रांस की क्रांति के आदर्श हैं। इन आदर्शों ने हमारे स्वतंत्रता संघर्ष को प्रेरित करने में मदद की और भारतीय संविधान के संस्थापकों को इससे मार्गदर्शन मिला।

सिंह ने कहा कि वह फ्रांस के राष्ट्रपति सारकोजी के आभारी हैं कि उन्होंने इस महान मौके पर भारत को सम्मान वाला स्थान दिया। पिछले साल गणतंत्र दिवस पर सारकोजी ने मुख्य अतिथि के तौर पर भाग लिया था और सिंह को मिला आमंत्रण पारस्परिक सदभावना संकेत के तौर पर देखा ज रहा है। फ्रांस में मुख्य अतिथि के तौर पर दूसरे देशांे की सरकारों के प्रमुखों को आमंत्रित करने का रिवाज नहीं रहा है और कुछ ही मौकों पर ऐसा किया जता है। सिंह ने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच के संबंध और सहयोग को सभी क्षेत्रों में मजबूती और अहमियत मिल रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच सामरिक भागीदारी है और दोनों ने उज्र, अंतरिक्ष अनुसंधान, रक्षा, उद्योग और वाणिज्य, वित्रान और प्रौद्योगिकी, शिक्षा, संस्कति तथा पर्यटन के क्षेत्र में भागीदारी के साथ ही जीवंत राजनीतिक संबंध स्थापित किये हैं।

सिंह ने कहा, मेरी यह तीव्र इच्छा है कि हमारे दो लोकतंत्रों के बीच की भागीदारी आने वाले वषरें में और भी मजबूत तथा गहरी हो। इससे दोनों देशों के लोगों को फायदा मिलेगा। दोनों देशों की सेना के बीच के रिश्ते भी पुराने हैं क्योंकि दोनों विश्व युद्धों के दौरान भारतीय सेना फ्रांस की सेना के साथ गठबंधन में लड़ी थी। मार्च 1915 में ब्रिटेन की कमान के तहत भारतीय सैनिक अलाइड डिविजन के एक हिस्से के तौर पर फ्रांस के बलों के साथ जर्मनी के बलों से न्यूवे चैपले में लड़े थे।

फ्रांस के राष्ट्रीय दिवस को बास्तिए दिवस या बास्तिल दिवस के तौर पर भी जन जता है। क्रांतिकारियों ने 14 जुलाई 1789 को बास्तिए जेल से बंदियों को मुक्त करा दिया था और वहीं से फ्रांस की क्रांति शुरू हुई थी। बास्तिए पर कब्जे के साथ लोगों ने यह मजबूत संदेश दिया था कि राज की शक्ति अब निरंकुश नहीं रही।

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