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मेट्रो निर्माण में लग रही है घटिया सामग्री: क्रशर संघ

दिल्ली के जमरूदपुर मेट्रो हादसे को लेकर हरियाणा के फरीदाबाद में स्थित पाली मोहब्बताबाद स्टोन क्रशर संघ ने दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन (डीएमआरसी) पर निर्माण कार्य में घटिया किस्म की सामग्री इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया है। क्रशर संघ के अध्यक्ष धर्मवीर भड़ाना ने एक संवाददाता सम्मेलन में यह बात कही।

उन्होंने बताया कि डीएमआरसी ने निर्माण कार्य के लिए इससे पहले जब तक उनके क्रशरों से तैयार की गई सामग्री का इस्तेमाल किया था तब तक एक भी ऐसा हादसा नहीं हुआ था। उन्होंने बताया कि एक अधिवक्ता की याचिका पर वर्ष 2002 में उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद मोहब्बताबाद स्टोन क्रशर को बंद कर दिया गया। उसके बाद हरियाणा के यमुनानगर एवं भिवानी और राजस्थान तथा देहरादून से मेट्रो निर्माण कार्य के लिए घटिया किस्म के पत्थर का इस्तेमाल किया जा रहा है। नतीजतन जमरूदपुर जैसे हादसे होने लगे हैं। संघ ने कहा कि अगर इसी तरह से घटिया किस्म की सामग्री मेट्रो निर्माण कार्य में लगती रही तो भविष्य में ऐसी कई घटनाएं हो सकती हैं।
 
भड़ाना ने मेट्रो निर्माण कार्य में मौजूदा समय में इस्तेमाल की जा रही सामग्री और मोहब्बताबाद स्टोन क्रशर के समय में इस्तेमाल की गई सामग्री की जांच मांग की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में एशियाड 1982 की खेलों के समय स्टेडियम एवं पुलों के निर्माण में सारी पत्थर सामग्री मोहब्बताबाद स्टोन क्रशर की लगी थी और वे अब तक ज्यों के त्यों हैं। भड़ाना का आरोप है कि अब उपरोक्त स्थानों से मेट्रो के लिए जो पत्थर का इस्तेमाल किया जा रहा है। उसमें सीसा और चूने की मिलावट है जिसके कारण अब यह मजबूती नहीं है।
 
भड़ाना ने कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित सेंटर फार एनवायरनमेंट (सीईसी) कमेटी ने अपनी रिपोर्ट ने कहा है कि मोहब्बताबाद स्टोन क्रशर क्षेत्र में 600 हैक्टेयर पहाड़ हैं जिसमें बहुत अच्छे किस्म का पत्थर है। इससे न तो वन विभाग प्रभावित होगा और न ही पर्यावरण। संघ के मुंताबिक वर्ष 1992 में राज्य सरकार द्वारा मोहब्बताबाद क्षेत्र में लगाए गए 160 क्रशर के लिए उच्चतम न्यायालय ने प्रमाण पत्र दिया था कि 50 वर्ष तक यहां पत्थर की कमी नहीं होगी और यहां बढि़या किस्म के पत्थर हैं तथा इसमें लोहे की भी प्रचुर मात्रा है जो मजबूती के लिए उपयुक्त होता है। लेकिन वर्ष 2002 में उच्चतम न्यायालय में याचिका दाखिल करके यह कहकर क्रशर बंद करा दिए गए कि खानों से पानी निकाला जाता है। संघ ने कहा कि पत्थर निकालने के लिए केवल 15 फुट तक खुदाई की जरूरत है जबकि पानी कई फुट गहराई तक खुदाई करने पर निकलता है। उनका आरोप है कि उनका क्रशर माननीय उच्चतम न्यायालय को गुमराह करके बंद करा दिया गया जबकि हकीकत कुछ और ही है।

संघ का कहना है कि अच्छी किस्म का पत्थर केवल फरीदाबाद के पहाड़ों में ही पाया जाता है जो दिल्ली से महज 30 किलोमीटर दूर है। परिणामस्वरूप 30 किलोमीटर के बजाय 200.400 किलोमीटर से माल मंगवाने पर इसका खर्च भी बढ़ा है और आज बजरी तथा डस्ट आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गया है।

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