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परिसंपत्तियों को लेकर यूपी व उत्तराखंड में ठनी

यूपी व उत्तराखंड के बीच सिंचाई परिसंपत्तियों को लेकर चल रही रार और तेज हो गई है। परिसंपत्तियों का यह विवाद शीघ्र सुलझने के आसार भी लगभग खत्म हो गए है। उत्तर प्रदेश इस मामले को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में जा रहा है। नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने के लिए यूपी सिंचाई विभाग ने सारी तैयारी पूरी कर ली है। अब बुधवार को इस मामले की याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करवाई जा रही है। यूपी सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता केपी सिंह ने मामले की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि नैनीताल हाईकोर्ट ने सभी सिंचाई परिसंपत्तियों को उत्तराखंड के कब्जे में देने का फैसला दिया है। यह फैसला यूपी सरकार के हित में नहीं है, लिहाजा विभाग इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार तक याचिका दायर कर देगा।


सिंचाई परिसंपत्तियों को लेकर उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड का झगड़ा तेज हो गया है। उत्तराखंड राज्य जहां इन परिसंपत्तियों पर कब्जे को आतुर हैं, वहीं यूपी सरकार इन्हें हाथ से फिसलने नहीं देना चाहती है। इस मामले में दोनों राज्यों के बीच कानूनी दांव-पेंच की लड़ाई तेज हो गई है। नैनीताल हाईकोर्ट ने अपने फैसले में हरिद्वार जिले में पड़ने वाली यूपी के कब्जे वाली सभी परिसंपत्तियों को उत्तराखंड के कब्जे में दिए जाने का फैसला दिया था। इस फैसले से उत्तराखंड सरकार ने राहत महसूस की थी। लेकिन यूपी सरकार की मुश्किलें इससे बढ़ गई। इन परिसंपत्तियों में शामिल नहरों, राजवाहों, भवनों व एक बड़े भू-भाग पर कब्ज बचाने के लिए यूपी सरकार अब सुप्रीम कोर्ट की राह पकड़ रही है।


यूपी सिंचाई विभाग के सूत्र बताते हैं कि यूपी सरकार ने परिसंपत्तियों के इस मामले को गंभीरता से लिया है और अफसरों को इस प्रकरण में कोई भी लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए हैं। विभाग के अधिशासी अभियंता रैंक के एक अधिकारी को मंगलवार को ही दिल्ली रवाना कर दिया गया है। लगभग बुधवार को यूपी की ओर से इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी जाएगी। मेरठ स्थित उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता केपी सिंह ने मामले की पुष्टि की है।

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